Cultural Heritage : 5000 साल पुरानी धरोहर पर दुनिया की नजर… करकाभाट के महापाषाणीय स्थल ने खींचे दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं के कदम

Cultural Heritage : 5000 साल पुरानी धरोहर पर दुनिया की नजर… करकाभाट के महापाषाणीय स्थल ने खींचे दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं के कदम

रायपुर, 06 मई। Cultural Heritage : छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रही है। करकाभाट में स्थित लगभग 5000 वर्ष पुराना महापाषाणीय स्थल अब विदेशी शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है। हाल ही में दक्षिण कोरिया से आए शोधकर्ताओं ने इस ऐतिहासिक स्थल का दौरा कर यहां की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का गहन अध्ययन किया।

महापाषाणीय संस्कृति का जीवंत साक्ष्य

करकाभाट का यह स्थल प्रागैतिहासिक काल की उन परंपराओं को दर्शाता है, जब मानव समाज अपने पूर्वजों की स्मृति में विशाल पत्थरों से स्मारक बनाया करता था। यहां पाए जाने वाले मेनहिर, डोलमेन और पत्थरों के वृत्त उस समय की अंतिम संस्कार पद्धतियों, सामाजिक संरचना और धार्मिक मान्यताओं का स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करते हैं। यह क्षेत्र महानदी घाटी के अंतर्गत आता है, जो पाषाण काल से महापाषाणीय काल तक मानव विकास की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

वैश्विक मंच पर उभरती पहचान

पिछले कुछ वर्षों से स्थानीय स्तर पर इस धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बालोद इको-टूरिज्म से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी शोधकर्ताओं ने गाइडों के साथ मिलकर इस स्थल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया।

विदेशी मेहमानों ने इस अनुभव को “अद्भुत और अविस्मरणीय” बताते हुए भविष्य में दोबारा आने की इच्छा भी जताई, जो इस स्थल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता को दर्शाता है।

पर्यटन विकास और रोजगार की संभावनाएं

राजेश अग्रवाल (पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री) ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थल छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिला रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल धरोहरों का संरक्षण नहीं, बल्कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना भी है।

छत्तीसगढ़ की विरासत का नया अध्याय

करकाभाट जैसे प्राचीन स्थल यह साबित करते हैं कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की बढ़ती दिलचस्पी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र वैश्विक शोध और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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