रायपुर, 29 अप्रैल। Makhana Farming : छत्तीसगढ़ में अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं, और इसी दिशा में मखाना की खेती एक नए और लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रही है। राज्य में मखाना उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार की योजना के तहत इसका क्रियान्वयन तेजी से किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी के अवसर मिल रहे हैं।
केंद्र की योजना से मिली गति, राज्य में बढ़ा दायरा
मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025-26 से योजना लागू की गई है, जिसके तहत राज्य को 178 लाख 11 हजार रुपये की स्वीकृति मिली है। इस योजना के लिए धमतरी, बालोद, महासमुंद और गरियाबंद जिलों का चयन किया गया है, जहां बड़े स्तर पर उत्पादन और प्रसंस्करण कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।
बाजार में बढ़ी मांग, प्रोसेसिंग से कई गुना मुनाफा
मखाना की सबसे बड़ी खासियत इसकी बाजार में लगातार बढ़ती मांग है। यदि किसान केवल बीज बेचने के बजाय उसे प्रोसेस कर मखाना तैयार कर बाजार में बेचते हैं, तो उन्हें कई गुना अधिक लाभ मिलता है। बीज को सुखाने, भूनने और प्रोसेसिंग के बाद तैयार मखाना 700 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है, जिससे यह एक आकर्षक नकदी फसल बन गई है।
किसानों और महिला समूहों की बढ़ती भागीदारी
राज्य में 133 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मखाना उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें तालाबों और कृषि भूमि दोनों का उपयोग किया जा रहा है। धमतरी जिले में 43 किसान और कई महिला स्व-सहायता समूह इस खेती से जुड़ चुके हैं। तालाबों में बुवाई का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है, जिससे उत्पादन में निरंतर वृद्धि की उम्मीद है।
प्रशिक्षण और तकनीक से मिल रहा बढ़ावा
मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी इस फसल के लिए बेहद अनुकूल है। राज्य में मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण की दिशा में निजी संस्थाएं भी सक्रिय हैं, जो किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।
भविष्य की बड़ी योजना, आय बढ़ाने पर फोकस
वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है, जिसमें नए तालाब निर्माण, उत्पादन क्षेत्र विस्तार और बीज उत्पादन शामिल हैं। इस पहल से आने वाले समय में अधिक किसानों को इस फसल से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
मखाना की खेती न केवल कम क्षेत्र में अधिक लाभ देने वाली फसल साबित हो रही है, बल्कि यह किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग के साथ यह फसल प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में नया आयाम जोड़ रही है।

