रायपुर, 23 अप्रैल। Green Gold : छत्तीसगढ सहित अन्य वन क्षेत्रों में तेन्दूपत्ता को ‘हरा सोना’ कहा जाता है, जो आदिवासी और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। हाल के नीतिगत बदलावों और सरकारी पहलों के चलते संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं।
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर को वर्ष 2024 से बढ़ाकर 4 हजार रुपये से 5 हजार 500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। इससे लाखों ग्रामीण परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
वृहद स्तर पर संग्रहण की तैयारी
वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के अंतर्गत 902 प्राथमिक समितियों में तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष लगभग 15 लाख से अधिक मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां और प्रत्येक गड्डी में 50 पत्ते शामिल होते हैं।
बस्तर में बढ़ी सहभागिता
बस्तर संभाग में 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों के माध्यम से करीब 4 लाख मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं अन्य क्षेत्रों में लगभग 11 लाख मानक बोरा संग्रहण की संभावना है। इस वर्ष 14 हजार से अधिक नए परिवार इस कार्य से जुड़े हैं, जिससे कुल संख्या में वृद्धि हुई है।
नए फड़ों की स्थापना और बेहतर प्रबंधन
नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ों की स्थापना की गई है। इसके साथ ही सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं। इस वर्ष सभी फड़ों में सुचारू रूप से संग्रहण कार्य प्रारंभ करने के लिए व्यापक तैयारी की गई है।
पारदर्शी भुगतान और आधुनिक व्यवस्था
संग्राहकों के लिए कार्ड, बोरा, सुतली, गोदाम और परिवहन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से भुगतान सीधे बैंक खातों में भेजा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो रही है। इस वर्ष तेन्दूपत्ता संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आएगा।

