रायपुर, 22 अप्रैल। MNREGA and Bihan : छत्तीसगढ में लोक-कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। मनरेगा और ‘बिहान’ के समन्वय से महिलाएं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरगुजा ज़िला की ‘रिमा’ स्व-सहायता समूह की सदस्य सविता ने मनरेगा के तहत अपने खेत में डबरी का निर्माण कराया। यह डबरी अब उनके लिए बहुउद्देशीय संसाधन बन गई है, जिससे वे मछली पालन के साथ-साथ सिंचाई भी कर रही हैं।
समूह से मिला सहयोग, बढ़ी आमदनी
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सविता को आर्थिक सहायता मिली। उन्होंने समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर डबरी में मत्स्य बीज डाले और मेहनत के बल पर लगभग डेढ़ लाख रुपये की मछलियों का विक्रय कर लाभ अर्जित किया। वर्तमान में भी उनकी डबरी में पर्याप्त मछलियां हैं, जिससे आगे और आय की संभावना बनी हुई है।
सिंचाई से खेती और पोषण में सुधार
डबरी के पानी से सविता अपने खेतों में साग-भाजी और अन्य फसलों की खेती कर रही हैं। इससे परिवार को पोषक आहार मिल रहा है और बाजार में बिक्री से अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।
आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
सविता ने अपनी सफलता का श्रेय शासन की योजनाओं को देते हुए कहा कि इन पहलों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। एक मां और जिम्मेदार नागरिक के रूप में वे आज सफल उद्यमी बनकर उभरी हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
प्रदेश में मनरेगा और ‘बिहान’ जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सम्मानजनक जीवनयापन के अवसर मिल रहे हैं। इससे न केवल उनका जीवन स्तर सुधर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।

