रायपुर, 03 मार्च। Forest and Wildlife Conservation : छत्तीसगढ़ वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य के रामपुर ग्रासलैंड में काले हिरण (ब्लैकबक) की संख्या बढ़ाने के प्रयास सफल रहे हैं। अब यह क्षेत्र फिर से इन दुर्लभ और सुंदर वन्यजीवों की उपस्थिति से जीवंत हो उठा है।
पुनर्स्थापन योजना से बढ़ी संख्या
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में काले हिरणों के पुनर्स्थापन का लक्ष्य तय किया गया। फरवरी के पहले सप्ताह में 30 काले हिरणों को रामपुर ग्रासलैंड में छोड़ा गया, जिसके बाद इस योजना को तेजी से लागू किया गया।
वैज्ञानिक तरीके से किया गया पुनर्वास
वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वैज्ञानिक प्रबंधन के उद्देश्य से अनुमति प्राप्त होने के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में हिरणों को सुरक्षित रूप से नए आवास में छोड़ा गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि हिरणों को किसी प्रकार का तनाव न हो। मुक्त किए गए हिरण अब पहले से मौजूद समूह के साथ सहज रूप से घुल-मिल गए हैं।
टीमवर्क से मिली सफलता
इस अभियान को मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसमें अभयारण्य के अधिकारियों, फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की अहम भूमिका रही।
जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
वन विभाग की टीम वर्तमान में इन हिरणों की नियमित निगरानी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में सकारात्मक सुधार होगा और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी।
यह सफलता दर्शाती है कि योजनाबद्ध प्रयास और विशेषज्ञों की देखरेख से विलुप्तप्राय प्रजातियों को फिर से जीवन दिया जा सकता है।

