रायपुर, 26 मार्च। Naxal-Affected Regions : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुदूर इलाकों में अब शिक्षा का उजाला तेजी से फैलता नजर आ रहा है। कभी भय और असुरक्षा के कारण जहां स्कूलों के दरवाजे बंद हो गए थे, वहीं अब बच्चों की किलकारियों और पढ़ाई की आवाजें गूंजने लगी हैं। शासन के निरंतर प्रयासों और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही योजनाओं ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। आज इन क्षेत्रों में बंदूक की आवाज की जगह किताबों की सरसराहट सुनाई देती है, जो एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और उस समय की परिस्थितियों के चलते सुकमा जिले के 123 विद्यालय बंद हो गए थे, जिनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक विद्यालय शामिल थे। लंबे समय तक शिक्षा से दूर रहे इन क्षेत्रों में प्रशासन के लगातार प्रयासों से अब सभी स्कूलों को फिर से शुरू कर दिया गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि जिले में अब एक भी विद्यालय नक्सल प्रभाव के कारण बंद नहीं है। यह बदलाव न केवल शिक्षा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि लोगों के मन में बढ़ते विश्वास को भी प्रतिबिंबित करता है।
बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार
शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए जिले में आधारभूत ढांचे को भी मजबूत किया गया है। वर्तमान में 16 पोटा केबिन आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें हजारों छात्र अध्ययन कर रहे हैं। छात्रावासों की सुविधा ने दूर-दराज के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का भी सफल संचालन किया जा रहा है, जहां छात्राएं सुरक्षित वातावरण में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं।
नई योजनाओं से शिक्षा का विस्तार
शिक्षा के दायरे को और अधिक बढ़ाने के लिए “नियद नेल्ला नार योजना” के तहत नए विद्यालय खोले जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में इस योजना के अंतर्गत चयनित गांवों में नए प्राथमिक विद्यालय शुरू किए गए हैं, जहां सैकड़ों बच्चों ने प्रवेश लिया है। इसके अलावा आने वाले समय में और भी विद्यालय खोलने की योजना बनाई गई है, जिससे कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
बदलाव की मजबूत होती नींव
इन सभी प्रयासों का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जो बच्चे पहले शिक्षा से दूर थे, वे अब नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं और नई-नई चीजें सीख रहे हैं। यह परिवर्तन केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, विकास और स्थिरता की नई नींव भी रख रहा है। आज बस्तर और सुकमा जैसे क्षेत्रों में शिक्षा के माध्यम से एक नई कहानी लिखी जा रही है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बनेगी।

