Pollution Issue : विधानसभा में उठा प्रदूषण का मुद्दा…! छत्तीसगढ़ में ‘रेड जोन’ में है 665 उद्योग…सरकार ने तय की 2 महीने की डेडलाइन

Pollution Issue : विधानसभा में उठा प्रदूषण का मुद्दा…! छत्तीसगढ़ में ‘रेड जोन’ में है 665 उद्योग…सरकार ने तय की 2 महीने की डेडलाइन

रायपुर, 20 मार्च। Pollution Issue : रायपुर में चल रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन प्रश्नकाल के दौरान पर्यावरण और उद्योगों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा सदन में गूंजा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश में अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

प्रदेश में 665 खतरनाक अपशिष्ट वाले उद्योग

महंत ने पूछा कि राज्य में ऐसे कितने उद्योग हैं, जो खतरनाक अपशिष्ट (हैजर्डस वेस्ट) उत्पन्न करते हैं और उनके नियंत्रण के लिए क्या व्यवस्थाएं हैं।इस पर जवाब देते हुए आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने सदन को बताया कि छत्तीसगढ़ में कुल 665 ऐसे उद्योग हैं, जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं।यह आंकड़ा अपने आप में चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि इन उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट का सीधा असर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ता है।

सिर्फ 19 उद्योगों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम

मंत्री ने आगे जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश के केवल 19 उद्योगों में ही ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है।हालांकि, इस सिस्टम की स्थापना के लिए अभी तक कोई अलग से राशि स्वीकृत नहीं की गई है।यह बात सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए कि जब उद्योगों की संख्या इतनी ज्यादा है, तो निगरानी व्यवस्था इतनी सीमित क्यों है।

दो महीने में सभी उद्योगों में सिस्टम लगाने का दावा

सदन में उठे सवालों के बीच मंत्री ओपी चौधरी ने आश्वासन दिया कि आने वाले दो महीनों के भीतर बाकी उद्योगों में भी ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित कर दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी लगातार उद्योगों का भौतिक निरीक्षण भी करते हैं और जहां कहीं भी अनियमितता पाई जाती है, वहां कार्रवाई की जाती है।

हैजर्डस मेटल पर भी नजर

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि खतरनाक धातुओं (हैजर्डस मेटल) के उत्सर्जन को लेकर भी लगातार जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर सतर्क है, लेकिन निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है।

बालको के अपशिष्ट पर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बालको (BALCO) से निकलने वाले अपशिष्ट को लेकर भी विशेष जानकारी मांगी।इस पर मंत्री ने बताया कि बालको में चार प्रकार के अपशिष्ट उत्पन्न होते हैं और उनके निपटान के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।उन्होंने कहा कि वहां पर हर साल 60 हजार मीट्रिक टन अपशिष्ट को रिसाइकल करने की क्षमता विकसित की गई है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

पर्यावरण बनाम औद्योगिक विकास

इस पूरे मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बन पाया है?जहां एक ओर उद्योग रोजगार और आर्थिक विकास के लिए जरूरी हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अपशिष्ट से होने वाला प्रदूषण भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है।

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