रायपुर, 15 मार्च। CG Heritage : छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कोंडागांव जिले के नवागढ़ क्षेत्र में मिले प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों को लेकर संस्कृति एवं पुरातत्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने त्वरित संज्ञान लिया है। मंत्री ने पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय को निर्देश दिए हैं कि विशेषज्ञ दल भेजकर क्षेत्र का जल्द स्थल निरीक्षण और विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाए।
5वीं–6वीं शताब्दी की प्रतिमाओं से बढ़ी ऐतिहासिक महत्व की संभावना
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि नवागढ़ क्षेत्र में 5वीं–6वीं शताब्दी ईस्वी से संबंधित प्राचीन प्रतिमाओं और अवशेषों की जानकारी सामने आने के बाद इस स्थल का वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विशेषज्ञ दल क्षेत्र में मौजूद सभी प्रतिमाओं, स्थापत्य अवशेषों, शिल्प कलाकृतियों और संभावित पुरातात्विक स्थलों का सूक्ष्म अध्ययन करे।
विस्तृत दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक जांच के निर्देश
उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान प्राप्त होने वाले सभी अवशेषों का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया जाए, ताकि इनके ऐतिहासिक महत्व का सही आकलन किया जा सके। सर्वे और निरीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यकतानुसार संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा के लिए कार्य शुरू किया जाएगा।
संरक्षित पुरातात्विक स्थल बनाने की भी तैयारी
मंत्री अग्रवाल ने कहा कि यदि जांच में इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होता है, तो नवागढ़ क्षेत्र को संरक्षित पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी पहल की जाएगी। इससे प्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ की धरती में छिपी है समृद्ध विरासत
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन सभ्यताओं, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक परंपराओं से समृद्ध रही है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में ऐसे महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं, जिनका व्यवस्थित अध्ययन और संरक्षण किया जाना जरूरी है।
संरक्षण में जनभागीदारी भी जरूरी
मंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। इन धरोहरों को सुरक्षित रखना केवल अतीत को संरक्षित करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और इतिहास से जोड़ने का माध्यम भी है। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐतिहासिक स्थलों और पुरातात्विक धरोहरों को संरक्षण के साथ-साथ शोध, अध्ययन और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी विकसित किया जाए। इससे प्रदेश की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर पर्यटन व रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

