रायपुर, 11 मार्च। BIHAAN : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘बिहान’ कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम दे रहा है। इस योजना के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के जनपद पंचायत चारामा क्षेत्र में भी महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
मसाला प्रसंस्करण इकाई से मिली नई पहचान
ग्राम तेलगरा की नारी शक्ति स्व-सहायता समूह की 10 महिलाओं ने आजीविका के लिए मसाला प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है। समूह की महिलाओं को प्रधानमंत्री खाद्य सूक्ष्म उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत 40-40 हजार रुपये की व्यावसायिक सहायता राशि मिली। इस सहायता से महिलाओं ने मसाला पिसाई और पैकेजिंग मशीन खरीदी तथा ‘नारी शक्ति मसाला प्रसंस्करण इकाई’ की शुरुआत की।
इस इकाई के माध्यम से महिलाएं विभिन्न मसालों का उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन कर रही हैं। शासन द्वारा उन्हें तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए भी दक्ष बनाया गया है।
जिला और राज्य स्तर के मेलों में बढ़ी मांग
समूह द्वारा तैयार किए गए मसाले विकासखंड के विभिन्न गांवों की किराना दुकानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कॉलेजों और छात्रावासों में बेचे जा रहे हैं। इसके साथ ही जिला और राज्य स्तर पर आयोजित सरस मेला में भी इन उत्पादों की अच्छी मांग देखी जा रही है। इस पहल से समूह की प्रत्येक महिला को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।
1600 से अधिक महिला समूह सक्रिय
जनपद पंचायत चारामा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोपाल सिंह कंवर ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। बीपीएम श्री साव के अनुसार विकासखंड चारामा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक 1600 से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है।
ये समूह कृषि, पशुपालन, लखपति दीदी योजना, आईएफसी योजना और अन्य सूक्ष्म उद्यमों से जुड़कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनकर समाज में नई पहचान स्थापित कर सकती हैं।

