नई दिल्ली, 05 सितंबर। Lunar Eclipse : इस वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को पड़ रहा है, जिसे भारत सहित कई देशों में आंशिक रूप से देखा जा सकेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण विशेष माना जा रहा है क्योंकि यह पितृ पक्ष (श्राद्ध काल) के दौरान पड़ रहा है।
ग्रहण की मुख्य जानकारी
- तारीख: 7 सितंबर 2025 (रविवार)
- ग्रहण प्रारंभ: रात 9:57 बजे
- ग्रहण समाप्ति: रात 1:26 बजे
- कुल अवधि: लगभग 3 घंटा
- दृश्यता: भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, पूर्वी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कुछ हिस्सों में
सूतक काल कब लगेगा?
- सूतक आरंभ: 7 सितंबर को दोपहर करीब 12:57 बजे (ग्रहण से 9 घंटे पूर्व)
- सूतक काल में वर्जित: भोजन, पूजा, शुभ कार्य, मंदिर दर्शन
नोट: गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक महत्त्व और प्रभाव
- यह चंद्र ग्रहण श्राद्ध पक्ष में आ रहा है, जिससे इसे पितृ ग्रहण योग माना जा रहा है।
- इस समय पिंडदान, तर्पण और मंत्रजाप करने से पितृ दोष निवारण में सहायता मिलती है।
- ग्रहण के दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और पितृ शांति मंत्र का जाप अत्यंत फलदायक होता है।
इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
- मेष, कर्क, तुला और मकर राशियों पर ग्रहण का प्रभाव तुलनात्मक रूप से अधिक रहेगा।
- इन राशियों के जातकों को मानसिक तनाव, निर्णय भ्रम, स्वास्थ्य समस्या का अनुभव हो सकता है।
- धनु, सिंह और मीन राशियों के लिए ग्रहण समय आत्मचिंतन और ध्यान के लिए उपयुक्त रहेगा।
ग्रहण से बचाव के उपाय
- ग्रहण से पूर्व तुलसी दल को भोजन में रखें
- ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान और स्तोत्र पाठ करें
- ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें, घर में गंगाजल का छिड़काव करें
- ब्राह्मण को दान, गौ सेवा और जरूरतमंदों को भोजन कराना पुण्यदायक रहेगा
- पितरों के नाम से तर्पण और अन्न दान करें
विज्ञान कहता है
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है। यह पूर्णतः प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसका मानव जीवन पर कोई सीधा वैज्ञानिक प्रभाव नहीं माना जाता। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसका विशेष महत्व है।
7 सितंबर को होने वाला चंद्र ग्रहण खगोलीय रूप से साल की अंतिम ग्रहण घटना है और धार्मिक रूप से यह श्राद्ध पक्ष में आने के कारण अधिक महत्वपूर्ण बन जाता है। यह समय ध्यान, साधना, दान और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ है।

