Anita Anand
कनाडा की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारतीय मूल की अनीता आनंद ने कनाडा की नई विदेश मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने पवित्र हिंदू ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ पर हाथ रखकर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली, जिससे कनाडा की संसद में पहली बार गीता की आध्यात्मिक गूंज सुनाई दी।
बता दें कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा हाल ही में किए गए कैबिनेट फेरबदल में अनीता को विदेश मंत्री बनाया गया है। वह इस पद को संभालने वाली पहली हिंदू महिला बन गई हैं। इससे पहले मेलानी जोली विदेश मंत्री थीं, जिन्हें अब उद्योग मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।
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अनीता आनंद इससे पहले जस्टिन ट्रूडो सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रही हैं। वह 2021 से 2023 तक रक्षा मंत्री और फिर ट्रेजरी बोर्ड की अध्यक्ष रहीं। 2025 के आम चुनावों में उन्होंने ओकविल से अपनी सीट बरकरार रखी और अब नई सरकार में एक प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।
वहीं शपथ ग्रहण के बाद अनीता ने कहा, “मैं कनाडा की विदेश मंत्री के तौर पर चुने जाने को लेकर सम्मानित महसूस करती हूं। मैं प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ मिलकर एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया के लिए काम करने को लेकर आशान्वित हूं।”
पारिवारिक पृष्ठभूमि:
अनीता का जन्म 1967 में नोवा स्कोटिया में हुआ था। उनके पिता तमिलनाडु और मां पंजाब से थीं। दोनों डॉक्टर थे और कनाडा में आकर बसे। राजनीति में आने से पहले अनीता टोरंटो विश्वविद्यालय में लॉ की प्रोफेसर और पेशे से वकील थीं।
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भारत से संबंध:
अनीता आनंद ने हमेशा अपनी भारतीय जड़ों को सम्मान दिया है। उन्होंने प्रवासी भारतीय दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर अपने भारतीय मूल और भारत-कनाडा संबंधों को उजागर किया है। रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने भारत-कनाडा रक्षा सहयोग को भी मजबूती दी।
यह नियुक्ति न केवल भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह कनाडा की बहुसांस्कृतिक राजनीति में एक प्रेरणादायक उपलब्धि भी है।

