EVM Verification Case in SC
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से चुनावी डेटा को डिलीट न करे। यह निर्देश उस समय दिया गया जब कुछ राजनीतिक दलों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी, और आरोप लगाए थे कि चुनावी डेटा को हटाया जा सकता है या उसमें छेड़छाड़ की जा सकती है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, फिलहाल, EVM से कोई डेटा न हटाएं और न ही कोई डेटा दोबारा लोड करें। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ावा देना है।
इसके तहत चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया गया कि वह चुनाव के दौरान एकत्रित किए गए सभी डेटा को सुरक्षित रखे और उसे बिना किसी कारण के न हटाए। यह कदम चुनावी परिणामों के निष्पक्ष और सही होने की दिशा में महत्वपूर्ण है, ताकि बाद में यदि कोई शिकायत या विवाद हो तो डेटा के माध्यम से जांच की जा सके।
याचिका में कोर्ट के पहले फैसले का हवाला
ADR की याचिका में पिछले साल आए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले का हवाला दिया गया। इस फैसले में कोर्ट ने बैलेट पेपर से चुनाव की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने से मना कर दिया था। इसके साथ ही वीवीपैट की सभी पर्चियों को गिनने की मांग को भी ठुकरा दी हालांकि, कोर्ट ने एक हफ्ते के अंदर ईवीएम की बर्न्ट मेमोरी की जांच की अनुमति दी थी।

जांच खर्च प्रत्याशी उठाएगा
26 मार्च, 2024 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नतीजे आने के एक सप्ताह के भीतर दूसरे या तीसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार ईवीएम की जांच की मांग कर सकता है। इसके लिए इंजीनियरों की टीम पांच माइक्रो कंट्रोलर की बर्न्ट मेमोरी की जांच करेगी। जांच का खर्च उम्मीदवार को उठाना होगा, लेकिन अगर गड़बड़ी साबित हुई तो यह खर्च उम्मीदवार को वापस कर दिया जाएगा।

