रायपुर, 12 जून। Water Conservation : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब उल्लेखनीय परिणाम देने लगे हैं। इसी कड़ी में जशपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत नीमगांव जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है। मनरेगा और जनभागीदारी के समन्वय से गांव में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण संरचनाएं विकसित की गई हैं। इन प्रयासों का असर अब गांव की जल उपलब्धता, कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका पर साफ दिखाई देने लगा है।
2587 कंटूर ट्रेंच ने रोका पानी का बहाव, बढ़ा भू-जल स्तर
ग्राम पंचायत नीमगांव के सरपंच श्री नागेंद्र भगत के नेतृत्व में जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया गया है। गांव में अब तक 2587 कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा चुका है। पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में बनाई गई इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल के तेज बहाव को रोककर उसे भूमि में समाहित करना है। इससे न केवल मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण मिला है, बल्कि भू-जल स्तर में भी लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इन संरचनाओं के कारण वर्षा का पानी अब व्यर्थ बहने के बजाय धरती के भीतर संग्रहित हो रहा है।
खेतों में नमी बनाए रखने के लिए विकसित किया गया 5 प्रतिशत मॉडल
जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए गांव में 5 प्रतिशत मॉडल के तहत खेतों के किनारों पर विशेष संरचनाएं तैयार की गई हैं। इनमें वर्षा जल संग्रहित होकर लंबे समय तक खेतों की नमी बनाए रखता है। इसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है, क्योंकि फसलों की वृद्धि बेहतर हो रही है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि देखी जा रही है। यह मॉडल खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
सोक पिट से जल प्रबंधन और स्वच्छता को मिली नई मजबूती
गांव में जल संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छता को भी प्राथमिकता दी गई है। हैंडपंपों के आसपास लगभग 30 सोक पिट का निर्माण कराया गया है, जिनके माध्यम से उपयोग किए गए पानी का सुरक्षित निस्तारण और भू-जल पुनर्भरण सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे जलभराव की समस्या में कमी आई है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। ग्रामीणों के अनुसार इन संरचनाओं ने गांव के जल प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया है।
भीषण गर्मी में भी पानी से लबालब हैं डबरियां, किसानों को मिला अतिरिक्त जल स्रोत
नीमगांव में निर्मित डबरियां जल संरक्षण की सफलता की एक और मजबूत मिसाल बनकर सामने आई हैं। इन संरचनाओं में वर्षा जल संग्रहित किया जाता है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल स्रोत उपलब्ध हो रहा है। विशेष रूप से इस वर्ष की भीषण गर्मी के दौरान भी कई डबरियां पानी से भरी हुई हैं, जो इन संरचनाओं की उपयोगिता और प्रभावशीलता को दर्शाती हैं। इससे किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और कृषि कार्यों में राहत मिली है।
जल संकट के स्थायी समाधान की ओर बढ़ता नीमगांव
जल संरक्षण के लिए किए जा रहे इन समन्वित प्रयासों से नीमगांव में भू-जल स्तर में सुधार, कृषि उत्पादन में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को नई मजबूती मिल रही है। गांव की यह पहल अब जल संकट के स्थायी समाधान का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य ग्राम पंचायतें भी इसी प्रकार के प्रयास अपनाएं तो जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में व्यापक बदलाव संभव है। नीमगांव आज इस बात का उदाहरण बन चुका है कि सामुदायिक सहभागिता और प्रभावी योजनाओं के माध्यम से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

