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NQAS : बदलते बस्तर की बुलंद तस्वीर… नक्सल प्रभावित मिनपा ने रचा इतिहास… राष्ट्रीय स्तर पर चमका स्वास्थ्य केंद्र… 94.94% अंकों के साथ मिला राष्ट्रीय NQAS सर्टिफिकेट

NQAS: A shining image of a transforming Bastar... Naxal-affected Minpa creates history... Health center shines at the national level... Awarded national NQAS certification with a score of 94.94%.

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सुकमा, 12 जून। NQAS : कभी नक्सलवाद, दुर्गम रास्तों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के लिए पहचाना जाने वाला सुकमा जिले का मिनपा क्षेत्र आज विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय कार्यों का परिणाम है कि मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र को 94.94 प्रतिशत अंकों के साथ राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के संघर्ष, सेवा और विकास की सफलता का प्रतीक बन गई है, जिसने कभी चुनौतियों के बीच जीवन बिताया था।

सुकमा के 16 स्वास्थ्य केंद्रों को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता का सम्मान

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सुकमा जिला लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। जिले में अब तक 16 स्वास्थ्य केंद्र राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक सर्टिफिकेशन प्राप्त कर चुके हैं। मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र का यह सम्मान स्वास्थ्य विभाग की मेहनत, प्रशासन की प्रतिबद्धता और ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण माना जा रहा है। इससे यह भी साबित हुआ है कि दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

क्या है NQAS सर्टिफिकेशन और क्यों है यह खास

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित एक विशेष मूल्यांकन प्रणाली है, जिसके तहत स्वास्थ्य केंद्रों की सेवा गुणवत्ता, मरीज संतुष्टि, परिचालन दक्षता और स्वास्थ्य सुविधाओं के स्तर का परीक्षण किया जाता है। इस प्रमाणन को हासिल करना किसी भी स्वास्थ्य संस्था के लिए उत्कृष्ट सेवाओं का राष्ट्रीय प्रमाण माना जाता है।

एक झोपड़ी से शुरू हुआ सफर, आज बना आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र

मिनपा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की शुरुआत एक साधारण झोपड़ी से हुई थी, लेकिन वर्ष 2024 में प्रशासन की पहल से यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नया उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया। आज इस केंद्र में आधुनिक चिकित्सा उपकरण, उन्नत प्रयोगशाला, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और चौबीसों घंटे उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं मौजूद हैं। यह केंद्र मिनपा सहित दुलेड़, एलमागुंडा, भटपाड़, पोट्टेमडगू, टोंडामरका और गुंडराजपाड़ जैसे दुर्गम गांवों के लगभग 3,593 ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी सुविधा बन चुका है।

जंगलों के बीच ‘नाइट कैंप’ लगाकर सेवा दे रहे स्वास्थ्य कर्मी

मिनपा की सफलता के पीछे स्वास्थ्य विभाग के उन कर्मवीरों की अथक मेहनत भी शामिल है, जो कठिन और जोखिम भरे जंगलों को पार कर ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं। कई बार दुर्गम गांवों से लौटना संभव नहीं होने पर स्वास्थ्यकर्मी वहीं रुककर ‘नाइट कैंप’ लगाते हैं और रात में भी मरीजों की जांच व उपचार करते हैं। टॉर्च और लालटेन की रोशनी में की जाने वाली यह सेवा स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण और मानवता की मिसाल बन गई है।

‘नियद नेल्लानार’ योजना से बदली सुदूर अंचलों की तस्वीर

कलेक्टर श्री अमित कुमार ने इस उपलब्धि को पूरे जिले के लिए ऐतिहासिक और गौरवशाली बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व और ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना की प्राथमिकताओं के कारण सुदूर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंच रही है। जिन क्षेत्रों में कभी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना भी चुनौती थी, वहां आज राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

ग्रामीणों का बढ़ा भरोसा, विकास की जीत का बना प्रतीक

स्वास्थ्य सेवाओं में आए इस बदलाव का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 20 से अधिक मरीजों का उपचार किया जा रहा है, वहीं हर महीने 4 से 5 सुरक्षित संस्थागत प्रसव भी कराए जा रहे हैं। यह उपलब्धि बताती है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनविश्वास और सेवा भावना एक साथ काम करते हैं, तो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी विकास का नया अध्याय लिखा जा सकता है। मिनपा आज इस बात का सशक्त उदाहरण बन चुका है कि विकास की रोशनी हर अंधेरे को पीछे छोड़ सकती है।

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