लखनऊ, 10 जून। UP Panchayat Elections: राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में जिला स्तर पर पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। दावों और आपत्तियों के निस्तारण के साथ-साथ व्यापक सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह फाइनल सूची प्रकाशित की गई है। हालांकि सूची जारी होते ही कई जिलों में तकनीकी समस्याओं के कारण मतदाताओं को इसे डाउनलोड करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस बार आयोग ने एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए प्रत्येक पंचायत मतदाता को 9 अंकों का यूनिक पहचान नंबर आवंटित किया है। आयोग का मानना है कि इससे मतदाता पहचान और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
1.81 करोड़ नए मतदाता जुड़े
राज्य निर्वाचन आयोग ने इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी। इसके बाद चलाए गए विशेष संशोधन अभियान में बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में करीब 1.81 करोड़ नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं, जबकि 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर मतदाता संख्या में लगभग 40.19 लाख की वृद्धि दर्ज की गई है।
छह महीने तक प्रशासक बने रहेंगे प्रधान
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। समय पर पंचायत चुनाव न हो पाने के कारण राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को अगले छह महीनों तक प्रशासक के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
ओबीसी आरक्षण पर आयोग की रिपोर्ट का इंतजार
पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग को जिलावार सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।
हालांकि पंचायत चुनाव जल्द कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग को जुलाई में ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है।
विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव पर सियासी गणित
प्रदेश में फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में राजनीतिक दल पंचायत चुनाव के समय को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं लड़े जाते, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई तेज हो जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने पर पार्टी संगठन प्रभावित हो सकते हैं। कई बार एक ही राजनीतिक दल से जुड़े प्रभावशाली कार्यकर्ता पंचायत चुनाव में आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे मुख्य चुनाव के दौरान संगठनात्मक एकजुटता पर असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि प्रदेश में ग्राम पंचायतों के साथ-साथ क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव भी एक साथ कराए जाने हैं। ऐसे में ओबीसी आरक्षण, न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारियों के बीच पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

