रायपुर, 09 जून। Natural Farming : किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित करने और पौष्टिक खाद्यान्नों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई है। कृषि विभाग द्वारा तैयार इस विशेष अभियान के तहत प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, पारंपरिक बीज संरक्षण और मिलेट्स (श्री अन्न) उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्राकृतिक खेती बनेगी किसान समृद्धि का आधार
अभियान का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से धीरे-धीरे प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रेरित करना है। इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। प्राकृतिक खेती में महंगे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे किसानों का मुनाफा बढ़ता है।
मिलेट्स को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाजों को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। इन फसलों को ‘श्री अन्न’ और सुपरफूड का दर्जा प्राप्त है। कम पानी में उगने वाली ये फसलें जलवायु परिवर्तन और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं।
पांच चरणों में लागू होगी योजना
अभियान के तहत मृदा स्वास्थ्य मैपिंग, सॉयल हेल्थ कार्ड सुदृढ़ीकरण, मिलेट्स उत्पादन विस्तार, जैविक खाद निर्माण प्रशिक्षण, सामुदायिक बीज बैंक स्थापना और हरित खाद वाले पौधों का रोपण किया जाएगा। जिले में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
135 ग्राम पंचायतों में होगा क्रियान्वयन
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले की 135 ग्राम पंचायतों में अभियान लागू किया जाएगा। इसके तहत 4,600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, 4,300 हेक्टेयर में मिलेट्स उत्पादन और 40 सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार अभियान के सफल क्रियान्वयन से किसानों की उत्पादन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। साथ ही दंतेवाड़ा के मिलेट्स को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के नए अवसर भी खुलेंगे। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने में मददगार साबित होगी।
टिकाऊ खेती की ओर बढ़ता दंतेवाड़ा
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल खेती की पद्धति बदलने का प्रयास नहीं, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसानों की आजीविका को सुरक्षित करने की व्यापक पहल है। सफल होने पर दंतेवाड़ा पूरे प्रदेश के लिए प्राकृतिक खेती का मॉडल बन सकता है।

