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भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार तैनात किए…कुल भंडार 190 तक पहुंचा

A major revelation has emerged regarding India's nuclear capabilities. According to a recent report from Sweden's Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI), India has placed 12 of its

India for the first time

नई दिल्ली, 09 जून। भारत की परमाणु ताकत को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। स्वीडन के स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली बार अपने 12 परमाणु हथियारों को परिचालन (तैनाती) स्थिति में रखा है। इसके साथ ही देश का कुल परमाणु भंडार बढ़कर लगभग 190 हथियारों तक पहुंच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 तक भारत के पास कोई भी परमाणु हथियार तैनात स्थिति में नहीं था, लेकिन 2026 में यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है। वहीं भारत का कुल परमाणु भंडार 180 से बढ़कर लगभग 190 हथियारों तक पहुंच गया है।

पाकिस्तान और चीन की स्थिति

 पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार हैं, हालांकि इनमें से कितने तैनात हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। वहीं चीन का परमाणु भंडार तेजी से बढ़कर लगभग 620 हथियारों तक पहुंच गया है।

SIPRI के अनुसार दुनिया एक नई परमाणु हथियारों की दौड़ की ओर बढ़ रही है, जिसमें अमेरिका, रूस, चीन, भारत और पाकिस्तान सहित सभी परमाणु संपन्न देश अपने हथियारों और मिसाइल प्रणालियों का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहे हैं।

दुनिया में कुल 12,187 परमाणु हथियार

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 9 देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु हथियार मौजूद हैं। इनमें से करीब 86

प्रतिशत हथियार केवल अमेरिका और रूस के पास हैं।

भारत की रणनीतिक क्षमता में वृद्धि

भारत अपनी सामरिक ताकत को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों और MIRV (एक मिसाइल से कई स्वतंत्र लक्ष्य भेदने की क्षमता) जैसी उन्नत तकनीकों पर काम कर रहा है, जिससे एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

समुद्री परमाणु ताकत भी मजबूत

 भारत की समुद्री परमाणु क्षमता का भी उल्लेख किया गया है। आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघा जैसी परमाणु पनडुब्बियां भारत की द्वितीय प्रहार (जवाबी हमला) क्षमता को और मजबूत बना रही हैं।

साइबर और डिजिटल युद्ध का भी उल्लेख

SIPRI ने अपनी रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव और “ऑपरेशन सिंदूर” का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान पहली बार दोनों देशों ने खुले तौर पर साइबर और डिजिटल ऑपरेशन का इस्तेमाल किया था।

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