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MGNREGA : जल संरक्षण का जन आंदोलन… जशपुर गढ़ रहा जल सुरक्षा का नया मॉडल

MGNREGA: Amidst the growing water crisis and changing climate, Chhattisgarh's Jashpur district is emerging as an inspiring example of water conservation. Here, water conservation is not just a government scheme, but a public participation initiative.

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रायपुर, 08 जून। MGNREGA : बढ़ते जल संकट और बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला जल संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभर रहा है। यहां जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं रहा, बल्कि जनभागीदारी से संचालित एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिले में मनरेगा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से भू-जल संवर्धन, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए नवाचार आधारित कार्य किए जा रहे हैं।

हर बूंद को संजोने का प्रयास

जशपुर जिले में वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करने के लिए घरों, शासकीय भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। ये संरचनाएं उपयोग किए गए पानी को जमीन में पुनर्भरण कर भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद कर रही हैं। साथ ही जलभराव जैसी समस्याओं में भी कमी आ रही है।

पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच तथा कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तीव्र बहाव को रोककर उसे जमीन में समाहित करती हैं, जिससे मिट्टी का कटाव कम होता है और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलता है।

आजीविका और जल संरक्षण का संगम

जशपुर में जल संरक्षण को ग्रामीण आजीविका से भी जोड़ा गया है। जिले में वर्तमान में 495 आजीविका डबरियों का निर्माण किया जा रहा है। इन डबरियों में संचित पानी किसानों के लिए सिंचाई का स्थायी स्रोत बनेगा। इससे रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

यह पहल जल संरक्षण को केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रखती, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है।

‘नवा तरिया’ अभियान से बढ़ी जल भंडारण क्षमता

जिले में संचालित ‘नवा तरिया’ अभियान भी उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णोद्धार से जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सीधा लाभ किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों को मिल रहा है।

जलाशयों के पुनर्जीवन से न केवल जल उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि गांवों में पर्यावरणीय संतुलन और हरित आवरण को भी मजबूती मिली है।

5 प्रतिशत मॉडल बना अभिनव पहल

जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मॉडल वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की दिशा में दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत कर रहा है।

जनभागीदारी से मिल रही सफलता

कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा है कि जल सुरक्षा केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है। जब समाज स्वयं इस अभियान का हिस्सा बनता है, तभी स्थायी परिणाम प्राप्त होते हैं। जिले में विभिन्न विभागों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।

जशपुर में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे ये नवाचार केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा नहीं कर रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी रख रहे हैं। भू-जल संवर्धन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक सकारात्मक परिणाम इस मॉडल की सफलता को प्रमाणित करते हैं।

आज जशपुर यह संदेश दे रहा है कि यदि संकल्प, जनसहभागिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण एक साथ जुड़ जाएं, तो जल संकट जैसी चुनौती को भी अवसर में बदला जा सकता है। जल संरक्षण की यह मुहिम वास्तव में विकसित और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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