रायपुर, 08 जून। International Archives Week : अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह के अवसर पर संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा 8 से 12 जून 2026 तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय की कला वीथिका (आर्ट गैलरी) में दुर्लभ ऐतिहासिक अभिलेखों की विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यह आयोजन इतिहास, संस्कृति और विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आमजन तक पहुंचाने का अनूठा प्रयास है।
दुर्लभ अभिलेखों में दिखेगी इतिहास की झलक
प्रदर्शनी में राज्य अभिलेखागार में संरक्षित उन महत्वपूर्ण दस्तावेजों की डिजिटल प्रतिकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी, जिन्हें राज्य पुनर्गठन के बाद भोपाल से स्कैन कर डिजिटल स्वरूप में प्राप्त किया गया था। इन अभिलेखों में वर्ष 1930 से 1955 के बीच के प्रशासनिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।
प्रदर्शनी में जनगणना अभिलेख, पुरातात्त्विक स्मारकों के संरक्षण संबंधी दस्तावेज, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रायपुर हवाई अड्डे की निर्माण योजनाएं, पृथक कोसल राज्य गठन के प्रयास, रियासतों के भारतीय संघ में विलय, भूमि सुधार कार्यक्रम, राजिम मेले के प्रशासनिक संचालन तथा राष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ प्रवास से जुड़े अभिलेख प्रमुख आकर्षण होंगे।
विशेषज्ञ व्याख्यान में समझेंगे अभिलेखों का महत्व
अभिलेखागार सप्ताह के अंतर्गत 9 जून 2026 को महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय सभागार में “न्याय के लिए अभिलेखागार : अधिकार, स्मृति और भविष्य” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली के विशेषज्ञ श्री दीपक तथा ओडिशा के अभिलेख विशेषज्ञ श्री सत्यनारायण मिश्र अभिलेख संरक्षण, डिजिटलीकरण और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिलेखों की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए सीखने का अवसर
यह प्रदर्शनी एवं व्याख्यान श्रृंखला विद्यार्थियों, शोधार्थियों, इतिहासकारों और संस्कृति प्रेमियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि अभिलेख केवल पुराने दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति, शासन की पारदर्शिता और इतिहास लेखन की आधारशिला हैं।
विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अभिलेखीय धरोहरों के संरक्षण और उनके महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आयोजन का उद्देश्य ऐतिहासिक दस्तावेजों को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना तथा सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के प्रति लोगों में संवेदनशीलता विकसित करना है।
