रायपुर, 04 जून। Green Chhattisgarh : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार हरित विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जनभागीदारी आधारित योजनाओं के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वन संपदा, जैव विविधता और जल संसाधनों से समृद्ध प्रदेश में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
वृक्षारोपण से बढ़ रही हरियाली और किसानों की आय
राज्य में हरियाली प्रसार योजना और किसान वृक्ष मित्र योजना के माध्यम से कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को पौधे उपलब्ध कराकर अपनी भूमि पर वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे हरित क्षेत्र का विस्तार होने के साथ किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। वहीं “एक पेड़ मां के नाम” अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है।
ऑक्सीवन और हरित परियोजनाओं से बदल रही शहरों की तस्वीर
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए ऑक्सीवन योजना के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। पर्यावरण वानिकी कार्यक्रमों के माध्यम से सड़कों के किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों को हरित स्वरूप दिया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदूषण नियंत्रण के साथ नागरिकों को बेहतर और स्वस्थ वातावरण मिल रहा है।
जल संरक्षण बना जनभागीदारी का अभियान
राज्य में ‘मोर गांव मोर पानी’ और ‘मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया गया है। पारंपरिक तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से जल सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है। जल संरक्षण की यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
नदियों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर विशेष जोर
नदी तट वृक्षारोपण योजना के तहत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है, जिससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण और भूजल संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमि संरक्षण परियोजनाओं के माध्यम से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ये पहलें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक बन रही हैं।
युवा पीढ़ी बन रही पर्यावरण संरक्षण की भागीदार
राष्ट्रीय हरित कोर योजना और ईको-क्लब कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी में पर्यावरणीय चेतना विकसित की जा रही है। इससे भविष्य के लिए जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। जल बचत, वृक्षारोपण, प्लास्टिक का कम उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। छत्तीसगढ़ में जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल इसी सोच को आगे बढ़ा रहा है।

