रायपुर, 02 जून। Self Help Group : महिलाएं यदि संकल्प और मेहनत के साथ आगे बढ़ें तो वे अपने जीवन की दिशा बदल सकती हैं। कबीरधाम जिले की रानी यादव इसकी जीवंत मिसाल हैं। कभी परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी और खेती पर निर्भर रहने वाली रानी यादव आज आत्मनिर्भर महिला के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। स्व-सहायता समूह से मिली आर्थिक सहायता और स्वयं के प्रयासों से उन्होंने मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कठिन परिस्थितियों से सफलता तक का सफर
कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत राम्हेपुर निवासी रानी यादव जय मां शारदा स्व-सहायता समूह की सचिव हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें खेती और मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था। उस समय उनकी वार्षिक आय लगभग 35 हजार रुपये थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना चुनौतीपूर्ण हो जाता था। इसी दौरान उन्होंने जय मां शारदा स्व-सहायता समूह से जुड़कर बचत, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाया।
समूह से मिली आर्थिक मदद बनी आधार
समूह की बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से रानी यादव को स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। उन्हें चक्रीय निधि से 5 हजार रुपये, सामुदायिक निवेश निधि से 60 हजार रुपये तथा बैंक ऋण के रूप में 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। मिली हुई राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने मुर्गी पालन व्यवसाय की शुरुआत की। प्रारंभ में छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह व्यवसाय उनकी मेहनत और लगन के कारण लगातार बढ़ता गया।
मुर्गी पालन से बढ़ी आय
आज रानी यादव की आय पहले की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है। उन्हें खेती से लगभग 30 हजार रुपये, मुर्गी पालन व्यवसाय से करीब 1 लाख 60 हजार रुपये तथा मजदूरी से लगभग 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार उनके परिवार की कुल वार्षिक आय बढ़कर लगभग 2 लाख 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।
आत्मनिर्भरता के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
रानी यादव बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। आर्थिक मजबूती के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं और भविष्य के लिए नई योजनाएं बना रही हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
रानी यादव की सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। वे लगातार महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़ने, बचत करने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

