दुर्ग, 2जून। जिला अस्पताल दुर्ग में इलाज के दौरान 20 वर्षीय युवती की मौत हो जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। परिजनों का कहना है कि समय पर खून नहीं मिलने के कारण युवती की जान चली गई। मामले की शिकायत सिविल सर्जन से की गई है, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, भिलाई के मरोदा निवासी दीपिका गाड़ा (20) पिछले कई दिनों से बीमार थी। शरीर में दर्द और कमजोरी की शिकायत बढ़ने पर शनिवार रात उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर में खून की मात्रा बेहद कम है और तत्काल ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक दीपिका सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी। उसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था और हीमोग्लोबिन स्तर करीब 5 ग्राम पाया गया। अस्पताल की ओर से परिजनों को तीन यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने के लिए कहा गया था। परिजनों का आरोप है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे तत्काल डोनर नहीं जुटा सके।
परिवार का कहना है कि उन्होंने अस्पताल स्टाफ और ब्लड बैंक से कम से कम एक यूनिट ब्लड उपलब्ध कराने की गुहार लगाई थी, ताकि इलाज शुरू हो सके। युवती की मां ने कई बार अस्पताल कर्मियों से मदद मांगी, लेकिन उन्हें खून उपलब्ध नहीं कराया गया। सोमवार शाम इलाज के दौरान दीपिका की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस संबंध में सिविल सर्जन को आवेदन भी सौंपा गया है।
वहीं, सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने कहा कि युवती की मौत केवल खून की कमी से हुई है, यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि आईसीयू के डॉक्टरों ने एस्पिरेशन की आशंका जताई है, जिसमें कोई पदार्थ सांस की नली के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच जाता है और मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगती है।
डॉ. मिंज ने यह भी माना कि आपात स्थिति में एक-दो यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया जा सकता था। उन्होंने कहा कि यदि मामला उनके संज्ञान में लाया जाता, तो ब्लड की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाता। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

