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ईडी की बड़ी कार्रवाई…1200 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क

The Raipur regional office of the Enforcement Directorate (ED) has seized assets worth approximately ₹1,200 crore in a major action in the much-talked-about Chhattisgarh liquor scam. The

ED's big

रायपुर, 2जून। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 1200 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की हैं। जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए हैं। इनमें 200 करोड़ रुपये के विलेख मूल्य और 1000 करोड़ रुपये से अधिक के संयुक्त बाजार मूल्य वाली संपत्तियां शामिल हैं।

ईडी की जांच रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। जांच में सामने आया कि 2019 से 2023 के बीच अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के नेतृत्व में संचालित शराब सिंडिकेट ने उत्पाद शुल्क व्यवस्था में व्यापक हेरफेर कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। एजेंसी के अनुसार शराब की खरीद दरों में कृत्रिम बढ़ोतरी, अवैध शराब उत्पादन और एफएल-10ए लाइसेंसों के माध्यम से करीब 2,883 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।

विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर की संपत्तियां कुर्क

पहले पीएओ के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। ईडी के मुताबिक विकास अग्रवाल सिंडिकेट के वित्तीय प्रबंधक के रूप में कार्य करते थे और शराब भट्टियों तथा एफएल-10ए लाइसेंसधारियों से कमीशन वसूलते थे। यह राशि अनवर ढेबर तक पहुंचाई जाती थी। अग्रवाल के परिवार के नाम पर दर्ज संपत्तियों को अपराध से अर्जित आय के बराबर मूल्य पर कुर्क किया गया है।

इसके अलावा रायपुर स्थित ढेबर सिटी होम्स में अनवर ढेबर की कथित बेनामी संपत्तियों और विभिन्न शेल कंपनियों के माध्यम से खरीदे गए पांच भूखंडों को भी कुर्क किया गया है। इस आदेश के तहत लगभग 30 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं।

गोवा के होटल वेस्टिन पर भी कार्रवाई

दूसरे पीएओ के तहत उत्तरी गोवा के अंजुना गांव स्थित प्रीमियम होटल वेस्टिन गोवा को अटैच किया गया है। यह होटल मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है। ईडी का दावा है कि होटल का अधिग्रहण करीब 110 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित राशि से किया गया था।

जांच एजेंसी के अनुसार इस धनराशि का भुगतान नकदी के रूप में किया गया था और इसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल के निर्देश पर पहुंचाया गया था। इस मामले में ईडी चैतन्य बघेल से पूछताछ भी कर चुकी है।

तीन कंपनियों के खाते और निवेश जब्त

तीसरे पीएओ के तहत एफएल-10ए लाइसेंसधारी तीन कंपनियों ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड अटैच किए गए हैं।

ईडी के अनुसार इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा शराब सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया था। यह राशि करीब 51 करोड़ रुपये बताई गई है।

चार नए आरोपी, कुल संख्या 85 पहुंची

ईडी ने रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में अपनी छठी पूरक अभियोग शिकायत भी दाखिल की है। इसमें चार नए आरोपियों विजय भाटिया, टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्रकार को शामिल किया गया है।

एजेंसी के अनुसार विजय भाटिया को दबाव बनाकर ओम साई बेवरेजेज में 52.5 प्रतिशत बेनामी हिस्सेदारी हस्तांतरित की गई थी, जबकि प्रोबीर शर्मा पर सिंडिकेट की ओर से करोड़ों रुपये नकद पहुंचाने का आरोप है। इस नई शिकायत के साथ मामले में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 85 हो गई है।

 

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