रायपुर, 01 जून। Smart Farming : कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये उर्वरक न केवल खेती की लागत कम करने में मदद करते हैं, बल्कि फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नैनो उर्वरक पौधों को सीधे पोषण उपलब्ध कराते हैं, जिससे पोषक तत्वों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से हो पाता है। पारंपरिक उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा मिट्टी में व्यर्थ चला जाता है, जबकि नैनो तकनीक आधारित उर्वरक पौधों तक आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाकर बेहतर परिणाम देते हैं।
महासमुंद के किसान ने पेश की मिसाल
महासमुंद जिले के ग्राम कोसरंगी निवासी प्रगतिशील किसान भूषण साहू ने धान की खेती में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया प्लस का सफल प्रयोग कर उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग और इफको के अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने खरीफ 2024 में नैनो यूरिया का प्रदर्शन परीक्षण किया था।
शुरुआती दौर में नैनो यूरिया से तैयार पौधे पारंपरिक उर्वरकों से उगाई गई फसल की तुलना में कम हरे दिखाई दिए, लेकिन उनकी वृद्धि पूरी तरह स्वस्थ रही। फसल कटाई के बाद उत्पादन की तुलना करने पर दोनों में कोई अंतर नहीं पाया गया।
दानेदार खाद की खपत हुई आधी
किसान भूषण साहू ने बताया कि रबी 2024 में उन्होंने नैनो डीएपी से बीजोपचार किया और फसल की बढ़वार के दौरान इसका छिड़काव किया। इसके परिणामस्वरूप पारंपरिक डीएपी की मात्रा 50 प्रतिशत तक कम करने के बावजूद उत्पादन में कोई कमी नहीं आई।
उन्होंने बताया कि नियमित उपयोग के बाद उनके खेतों में पारंपरिक दानेदार खादों की खपत लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो गई है। उनका मानना है कि नैनो उर्वरक भविष्य की टिकाऊ और लाभकारी खेती का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक
भूषण साहू का कहना है कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। वहीं नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इससे पौधे अधिक स्वस्थ रहते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है।
कृषि विभाग ने बढ़ाया उपयोग का दायरा
कृषि विभाग ने किसानों से नैनो यूरिया प्लस और नैनो डीएपी के अधिकाधिक उपयोग की अपील की है। विभाग का मानना है कि इससे उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसानों की उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।
महासमुंद जिले में इस वर्ष नैनो डीएपी की 74 हजार बोतलों और नैनो यूरिया की 30 हजार 250 बोतलों के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वैज्ञानिक तरीके से करें उपयोग
कृषि विभाग ने किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी भी दी है। बीजोपचार के लिए प्रति किलोग्राम बीज में 5 मिलीलीटर नैनो डीएपी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं फसल की बढ़वार के दौरान निर्धारित मात्रा में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया प्लस का छिड़काव करने से बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि नैनो उर्वरकों को अधिकांश कीटनाशकों के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इन्हें तांबा युक्त कीटनाशकों और फफूंदनाशकों के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
आधुनिक खेती की ओर बढ़ते कदम
नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती में लागत कम होने, उत्पादन बढ़ने और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर रहने जैसे लाभ सामने आ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार इनका उपयोग करें, तो आने वाले समय में यह तकनीक खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

