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Green Chhattisgarh : हरियाली की ओर बढ़ते कदम… कवर्धा में वृहद वृक्षारोपण बना पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार

Green Chhattisgarh: Steps Towards Greenery... Massive Tree Plantation in Kawardha Becomes a Strong Foundation for Environmental Conservation.

Green Chhattisgarh

रायपुर, 01 जून। Green Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा प्रदेश के वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, संवर्धन और राजस्व वृद्धि के लिए लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कवर्धा परियोजना मंडल ने पिछले पांच वर्षों में वृहद वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। बंजर और कम घनत्व वाले वन क्षेत्रों को पुनर्जीवित कर हरित संपदा में बदलने का यह प्रयास हरित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर हुआ वृक्षारोपण

कवर्धा परियोजना मंडल ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करते हुए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया है। इस अभियान से वन क्षेत्र का विस्तार हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिली है।

सागौन रोपण से तैयार हो रहा भविष्य का हरित धन

परियोजना मंडल द्वारा 1497 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 25 लाख सागौन पौधों का रोपण किया गया है। इसके लिए रूटशूट तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे पौधों की जड़ों का विकास तेजी से हुआ और उनकी जीवित रहने की क्षमता में वृद्धि हुई। यह तकनीक पौधों को प्रतिकूल मौसम और कीटों से सुरक्षा प्रदान करने में भी कारगर साबित हुई है।

मिश्रित प्रजातियों के पौधों से बढ़ी जैव विविधता

हरियर छत्तीसगढ़ योजना के तहत 25 हेक्टेयर क्षेत्र में 22 हजार मिश्रित प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली है और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिला है।

नीलगिरी रोपण से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्लोनल नीलगिरी पौधों का भी रोपण किया गया है। परियोजना मंडल ने 6.5 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 15 हजार नीलगिरी पौधे लगाए हैं, जो भविष्य में त्वरित उत्पादन और राजस्व वृद्धि का आधार बनेंगे।

बिना फेंसिंग के भी सुरक्षित रहे पौधे

कवर्धा परियोजना मंडल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि विशाल वृक्षारोपण क्षेत्र में कहीं भी कृत्रिम फेंसिंग नहीं की गई। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से पौधों की जीवितता दर 80 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यह सामुदायिक सहयोग और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

भविष्य में मिलेगा मजबूत राजस्व आधार

वन विकास निगम की आय का प्रमुख स्रोत सागौन का वैज्ञानिक विरलन है। वर्तमान में लगाए गए सागौन पौधे आने वाले वर्षों में उच्च गुणवत्ता वाली इमारती लकड़ी उपलब्ध कराएंगे, जिससे निगम को दीर्घकालिक राजस्व प्राप्त होगा और आर्थिक मजबूती मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

वृहद वृक्षारोपण अभियान से भविष्य में लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण होने की संभावना है। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही जल संरक्षण बढ़ेगा, मृदा अपरदन में कमी आएगी और वन्यजीवों को सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा।

रोपण, निंदाई-गुड़ाई और संरक्षण कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता दी गई। इससे वनांचल के लोगों को रोजगार मिला, उनकी आय में वृद्धि हुई और वन संरक्षण कार्यों के प्रति उनका विश्वास और सहभागिता भी मजबूत हुई।

कवर्धा परियोजना मंडल की यह सफलता दर्शाती है कि वैज्ञानिक सोच, बेहतर प्रबंधन और जनसहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। यह पहल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रही है।

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