रायपुर, 1जून। Forest Department: छत्तीसगढ़ वन विभाग में वर्षों से लंबित विभागीय जांच प्रकरणों को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुराने सभी जांच मामलों का अगले तीन महीने के भीतर निराकरण किया जाए। निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वन मंत्री ने कहा कि विभाग में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जांच प्रस्ताव 4 से 5 वर्ष की देरी से भेजे गए। वहीं कुछ प्रकरण कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद सामने आए, जो सुशासन और कर्मचारियों के हित दोनों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक जांच लंबित रहने से कर्मचारियों को मानसिक, सामाजिक और सेवा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी पदोन्नति, पेंशन और पूरे करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी दोषी है तो उसके खिलाफ समय पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि वह निर्दोष है तो उसे जल्द राहत मिलनी चाहिए।
केदार कश्यप ने विभाग को एक महीने के भीतर सभी लंबित जांच प्रकरणों का विस्तृत ब्यौरा तैयार करने और प्राथमिकता के आधार पर उनके निराकरण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना प्रशासनिक सुधार संभव नहीं है और लंबित मामलों के निपटारे में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी|

