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छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाज़ी तेज…हसदेव अरण्य को लेकर विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

The political atmosphere in Chhattisgarh has once again heated up. Opposition parties have launched a scathing attack on the state government, accusing it of

politics in chhattisgarh

रायपुर, 29मई। छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर तीखे हमले करते हुए प्रशासनिक अव्यवस्था और कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता देने के आरोप लगाए हैं।

विपक्ष का कहना है कि राज्य में मंत्रियों और सांसदों के बीच सार्वजनिक रूप से अधिकारियों से टकराव की स्थिति दिखाई दे रही है, जिससे प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार के भीतर तालमेल की कमी के कारण सरकारी तंत्र प्रभावित हो रहा है और आम जनता से जुड़े मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।

भूपेश बघेल ने साय सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार जनता के हितों की बजाय “स्वार्थ पूर्ति” में लगी हुई है। विपक्ष का दावा है कि राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था दबाव में काम कर रही है और निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिख रही है।

सबसे बड़ा विवाद हसदेव अरण्य क्षेत्र को लेकर सामने आया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़ी परियोजनाओं के लिए इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को मंजूरी दी गई है। अनुमान के मुताबिक करीब 7 लाख पेड़ काटे जाने की बात कही जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का कहना है कि इससे आदिवासी समुदायों की आजीविका, जंगलों की जैव विविधता और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि हसदेव क्षेत्र केवल जंगल नहीं बल्कि हजारों आदिवासी परिवारों की जीवनरेखा है, जिसे जोखिम में डाला जा रहा है।

 

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