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Barnawapara के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी… जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता

Rare Giant Indian Squirrel Spotted in Barnawapara's Devpur Forest—A Major Success for Biodiversity Conservation

Barnawapara

रायपुर, 28 मई। Barnawapara : छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह का माहौल है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं।

देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजाति

बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट श्री हेमंत वर्मा ने की। विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका (Ratufa indica) है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक मानी जाती है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है और इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का आकर्षक मिश्रण पाया जाता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर बिताती है और लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

संरक्षित प्रजाति और स्वस्थ वन तंत्र का संकेत

विशाल भारतीय गिलहरी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित प्रजाति है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है तथा देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है।

बच्चों और युवाओं में बढ़ी जागरूकता

वन विभाग के अनुसार देवपुर समर कैंप में शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के प्रत्यक्ष दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। वन विभाग का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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