Jashpur के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान… परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी और नकद फसलों की ओर बढ़ रहे कदम

Jashpur के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान… परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी और नकद फसलों की ओर बढ़ रहे कदम

रायपुर, 24 मई। Jashpur हमेशा से फसल विविधताओं के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसान अब परंपरागत फसलों के साथ उद्यानिकी और नकद फसलों पर भी विशेष जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिले में उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण को देखते हुए किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जिला प्रशासन और नाबार्ड के प्रयासों से बदल रही तस्वीर

मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर स्थानीय जिला प्रशासन, नाबार्ड और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन समन्वित प्रयासों से पिछले दो-ढाई वर्षों में किसानों की रुचि परंपरागत फसलों से हटकर उद्यानिकी एवं नगदी फसलों की ओर बढ़ी है।

जशपुर के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान

चाय, लीची, स्ट्रॉबेरी के बाद अब सेब की खेती

जशपुर के किसान अब चाय, लीची, स्ट्रॉबेरी, नाशपाती के साथ-साथ सेब के बागान भी तैयार कर रहे हैं। जिला प्रशासन, उद्यानिकी विभाग, रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (READS) और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से जिले ने फलोत्पादन और बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।

410 एकड़ में फैल चुकी है सेब की खेती

जशपुर में वर्ष 2023 में शुरू हुई सेब की खेती अब लगभग 410 एकड़ तक फैल चुकी है, जिसमें करीब 410 किसान जुड़े हुए हैं। मनोर और बगीचा विकासखंड सहित शैला, छतौरी, करदना और छिछली पंचायतों में लगाए गए सेब के वृक्षों ने इस वर्ष उत्कृष्ट गुणवत्ता और आकार के फल दिए हैं। किसानों का कहना है कि जशपुर के सेब स्वाद और गुणवत्ता में कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश के सेबों के समकक्ष हैं।

नाशपाती उत्पादन में भी अग्रणी बन रहा जशपुर

जिले में नाशपाती के बाग लगभग 3,500 एकड़ में फैले हुए हैं, जहां 3,500 से अधिक किसान इसकी खेती कर रहे हैं। सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाशपाती उत्पादन हो रहा है। यहां से नाशपाती दिल्ली, उत्तरप्रदेश और ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भेजी जाती है। जिले का वार्षिक नाशपाती उत्पादन लगभग 1,75,000 क्विंटल तक पहुंच चुका है।

जशपुर के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान

किसानों की आय में हो रही उल्लेखनीय वृद्धि

किसानों को नाशपाती से प्रति एकड़ सालाना लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

जशपुर में चाय की खेती पहले से ही प्रसिद्ध रही है और अब सेब एवं नाशपाती उत्पादन की सफलता ने जिले को फल उत्पादन के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। इससे स्थानीय किसानों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है और भविष्य में इन फसलों का दायरा और बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

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