रायपुर, 22 मई। Kopra Reservoir : छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल बना कोपरा जलाशय आज जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा और जनभागीदारी का शानदार उदाहरण बनकर उभर रहा है। “जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026” की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” को यह आर्द्रभूमि वास्तविक रूप में साकार कर रही है।
प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना
Kopra Reservoir हर साल हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय बन रहा है। यहां पक्षियों के साथ जलीय जीव, मछलियां और दुर्लभ वनस्पतियां भी प्राकृतिक संतुलन को मजबूत कर रही हैं।
जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का केंद्र
कोपरा जलाशय क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए जल, मत्स्य पालन और कृषि का प्रमुख आधार बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आर्द्रभूमि भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण और कार्बन अवशोषण में भी अहम भूमिका निभा रही है।
जनभागीदारी से मजबूत हो रहा संरक्षण अभियान
स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और स्कूलों की भागीदारी से यहां वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, बायो-फेंसिंग और पक्षी संरक्षण जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया गौरव का विषय
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोपरा जलाशय को रामसर स्थल की मान्यता मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कोपरा जलाशय यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा भागीदारी से ही संभव है। स्थानीय स्तर के छोटे प्रयास भविष्य में बड़े वैश्विक बदलाव की नींव बन सकते हैं।

