Site icon AB News.Press

Bear Rescue : कांकेर के जंगलों में दिखी ‘जानवरों के बीच इंसानियत’…! पत्थरों में फंसे शावक की चीख सुन दौड़े दूसरे भालू…खुद ही किया ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’

Bear Rescue: ‘Humanity Among Animals’ Witnessed in the Forests of Kanker! Hearing the cries of a cub trapped amidst the rocks, other bears rushed to the scene—and carried out the ‘rescue operation’ themselves.

Bear Rescue

कांकेर, 21 मई। Bear Rescue : कांकेर के गढ़िया पहाड़ में उस वक्त दर्दभरी चीखों से गूंज उठी, जब पत्थरों के बीच फंसा एक मासूम भालू शावक मदद के लिए लगातार पुकारता रहा। लेकिन जो नजारा इसके बाद सामने आया, उसने इंसानों को भी भावुक कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, 18 मई की रात राजापारा इलाके के गढ़िया पहाड़ में कुछ भालू विचरण करते दिखाई दिए थे। देर रात एक भालू शावक की तेज चीखें सुनाई देने लगीं। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य आवाज समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन जब आवाज लगातार बढ़ती गई तो पहाड़ के नीचे रहने वाले लोग सतर्क हुए।

भालुओं के हमले के डर से कोई भी घटनास्थल तक नहीं पहुंचा। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ड्रोन की मदद से शावक को खोजने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नजर नहीं आया।

फिर जंगल बना ‘रेस्क्यू टीम’

इधर शावक की दर्दभरी आवाज सुनकर दूसरे भालू लगातार उस इलाके में पहुंचने लगे। 19 मई की सुबह से शाम तक भालुओं की आवाजाही जारी रही। देर रात पत्थर हटने जैसी आवाजें सुनाई दीं और उसके बाद शावक की चीखें अचानक बंद हो गईं।

फायर वाचर सुनील यादव के मुताबिक, कुछ भालू उस ओर गए थे और काफी देर तक पत्थर हटाने जैसी आवाज आती रही। माना जा रहा है कि भालुओं ने अपनी ताकत से पत्थर हटाकर शावक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

वन विभाग ने क्या कहा?

अमितेश परिहार ने बताया कि सुबह ही शावक के पत्थरों में फंसे होने की सूचना मिल गई थी। वन विभाग की टीम ने ड्रोन से तलाश की, लेकिन शावक दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भालू अपने प्राकृतिक आवास में था और ऐसी स्थिति में वहां जाना बेहद खतरनाक हो सकता था। खासकर मादा भालू अपने शावक को बचाने के लिए बेहद आक्रामक हो जाती है। रेंजर के मुताबिक, अगर शावक सचमुच फंसा था, तो संभावना है कि मादा भालू ने उसे निकालने के लिए पूरी ताकत लगा दी होगी।

जंगल में दिखी ममता की अनोखी मिसाल

इस घटना ने जंगल के जीवों के बीच अपनत्व, संवेदना और परिवार जैसी भावना की एक अनोखी तस्वीर पेश की है। सोशल मीडिया पर भी यह घटना तेजी से चर्चा में है और लोग इसे ‘जंगल की इंसानियत’ बता रहे हैं।

Exit mobile version