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Tendu Leaf Collectors के लिए वन विभाग की जनकल्याणकारी योजनाएं बनी सहारा… करोड़ों रुपये की सहायता राशि वितरित

Forest Department's Welfare Schemes Become a Lifeline for Tendu Leaf Collectors... Aid Worth Crores of Rupees Distributed.

Tendu Leaf Collectors

रायपुर, 20 मई। Tendu Leaf Collectors : वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग द्वारा वन आश्रित परिवारों और तेन्दूपत्ता संग्राहकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। “वन है तो जीवन है, तेन्दूपत्ता है तो रोजगार है” के संदेश के साथ विभाग रोजगार, बीमा, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध करा रहा है।

तेन्दूपत्ता संग्रहण से मिल रहा रोजगार

शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर 5.50 रुपये प्रति गड्डी निर्धारित की है। इसके अनुसार 100 गड्डियों पर 550 रुपये और प्रति मानक बोरा 5550 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को आर्थिक सहारा मिल रहा है।

लघु वनोपजों का मिल रहा उचित मूल्य

न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत सालबीज, महुआ, इमली, कोदो और माहुल पत्ता सहित विभिन्न लघु वनोपजों की खरीदी तय दरों पर की जा रही है। इससे वन आश्रित परिवारों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है।

बीमा योजनाओं से सामाजिक सुरक्षा

राजमोहनी देवी बीमा योजना के तहत तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों को सामान्य मृत्यु, दुर्घटना और विकलांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता दी जा रही है। समूह बीमा योजना के माध्यम से परिवार के अन्य सदस्यों को भी लाभ मिल रहा है।

बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति

तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के साथ व्यावसायिक एवं गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

चरण पादुका योजना से राहत

वनांचल में कार्य करने वाले तेन्दूपत्ता संग्राहकों को हर वर्ष चरण पादुका वितरित की जा रही है, ताकि उन्हें कार्य के दौरान सुविधा मिल सके। राजमोहनी देवी बीमा योजना के तहत अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2025 तक 33 हितग्राहियों को 34 लाख 70 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई। वहीं समूह बीमा योजना के तहत 18 प्रकरणों में 2 लाख 16 हजार रुपये का भुगतान किया गया।

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