लखनऊ ,18मई। उत्तर प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आनुपातिक आरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य स्तरीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है।
सरकारी निर्णय के अनुसार आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे और इसका नेतृत्व एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश करेंगे। यह आयोग पंचायत व्यवस्था में ओबीसी वर्ग की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगा।
आयोग को राज्य के सभी 75 जिलों में जाकर जातिवार आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों की समीक्षा करने का दायित्व दिया गया है। इसके लिए आयोग को छह महीने का समय दिया गया है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे सरकार को सौंपा जाएगा।
रिपोर्ट आने के बाद आरक्षण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे जाएंगे, ताकि अंतिम निर्णय से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया जा सके।
प्रदेश में वर्तमान में पंचायतों में पिछड़े वर्गों के लिए अधिकतम 27 प्रतिशत आरक्षण लागू है। लेकिन अब Supreme Court के निर्देशों के अनुरूप डेटा आधारित आरक्षण प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार आयोग की रिपोर्ट सितंबर या अक्टूबर तक आने की संभावना है। वहीं अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित होने के कारण पंचायत चुनावों की तारीख को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं।

