MGNREGA : विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025… ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सशक्तिकरण का नया अध्याय

MGNREGA : विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025… ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सशक्तिकरण का नया अध्याय

रायपुर, 16 मई। MGNREGA : भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम 2025 अधिसूचित किया गया है। यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगी और वर्तमान मनरेगा का स्थान लेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री ने इसे ग्रामीण समृद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत-2047 संकल्प को साकार करने में यह अधिनियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

125 दिनों की कानूनी रोजगार गारंटी

नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल श्रम कार्य की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 95,692.31 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंशदान सहित कुल व्यय 1.51 लाख करोड़ रुपए से अधिक होगा।

DBT के माध्यम से भुगतान

योजना के तहत मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में DBT के जरिए किया जाएगा। भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिकों को विलंब क्षतिपूर्ति का अधिकार मिलेगा।

रोजगार नहीं मिलने पर मिलेगा भत्ता

यदि निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा। नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य चयन के अधिक अधिकार दिए गए हैं। इससे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना और ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

पुराने जॉब कार्ड रहेंगे मान्य

ई-केवाईसी सत्यापित वर्तमान मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक चल रहे सभी कार्य बिना रुकावट जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में शामिल हो जाएंगे।

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

यह अधिनियम केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने की दिशा में बड़ा अभियान माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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