रायपुर, 16 मई। Chhattisgarh में सहकारिता आंदोलन अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार सहकारी समितियों को मजबूत कर किसान सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को नई दिशा दे रही है।
प्रधानमंत्री के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ में सहकारिता मॉडल को आधुनिक और बहुउद्देश्यीय स्वरूप दिया जा रहा है। राज्य में सहकारी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए 515 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) का गठन किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में कुल PACS समितियों की संख्या बढ़कर 2,573 हो गई है। अब ये समितियां केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांवों में बहुउद्देश्यीय सेवा केंद्रों के रूप में कार्य कर रही हैं।
गांवों में मिल रहीं अनेक सुविधाएं
इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज, जन औषधि केंद्र, उर्वरक वितरण और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसी सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत किसानों को स्थानीय स्तर पर भंडारण सुविधा मिलने से उन्हें कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
महिलाओं और युवाओं को मिल रहा लाभ
दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में सहकारी समितियों के जरिए महिलाओं और युवाओं को उद्यमिता से जोड़कर आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजिटलीकरण से बढ़ी पारदर्शिता
राज्य सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया है। समितियों के कंप्यूटरीकरण से बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और लेनदेन अधिक पारदर्शी बने हैं। ई-मार्केटप्लेस के माध्यम से स्थानीय सहकारी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की पहल भी की जा रही है।
विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में कदम
राज्य सरकार का कहना है कि सहकारिता अब केवल ऋण व्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का मजबूत माध्यम बन चुकी है। गांवों के सहकारी ढांचे को मजबूत कर विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।

