बिलासपुर, 16 मई| बिलासपुर में साल 2019 के चर्चित विराट अपहरण कांड मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कहा कि मासूम बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण समाज के लिए बेहद गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में दोषियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
6 साल के विराट का हुआ था अपहरण
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2019 में व्यवसायी विवेक सराफ के 6 वर्षीय बेटे विराट सराफ का घर के बाहर खेलते समय अपहरण कर लिया गया था। बदमाश बिना नंबर की सफेद कार में आए और बच्चे को जबरन उठाकर फरार हो गए। अगले ही दिन आरोपियों ने विराट के पिता से 6 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी और बच्चे को जान से मारने की धमकी दी।
घटना के बाद पुलिस ने लगातार छह दिनों तक जांच और सर्च ऑपरेशन चलाया। सातवें दिन जरहाभाठा इलाके के एक मकान से विराट को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। मौके से एक आरोपी गिरफ्तार हुआ, जबकि बाद में पूरे गिरोह को पकड़ लिया गया।
बड़ी मां निकली साजिश की मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि पूरे अपहरण की साजिश विराट की बड़ी मां नीता सराफ ने रची थी। बताया गया कि वह भारी कर्ज में डूबी हुई थी और पैसों की जरूरत के चलते उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि पहले परिवार के दूसरे बच्चे के अपहरण की योजना बनाई गई थी, लेकिन योजना सफल नहीं होने पर आरोपियों ने विराट को निशाना बनाया। अपहरण के बाद भी नीता सराफ रोज पीड़ित परिवार के घर पहुंचती थी और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचा रही थी।
तकनीकी साक्ष्यों से मजबूत हुआ केस
पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, फिंगरप्रिंट और वॉयस सैंपल जैसे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया। ट्रायल कोर्ट ने दो साल पहले सभी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट बोला- ऐसे अपराध समाज में डर पैदा करते हैं
सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने माना कि अपहरण पूरी तरह सुनियोजित था और इसका उद्देश्य फिरौती वसूलना था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराध न केवल पीड़ित परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करते हैं।
इन्हीं तथ्यों और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने सभी दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

