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Lakhpati Didi : बासनपाली की मालती कुंभकार बनीं ‘लखपति दीदी’… मिट्टी की पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़कर बनीं आत्मनिर्भर उद्यमी

Lakhpati Didi: Malti Kumbhakar of Basanpali Becomes a ‘Lakhpati Didi’—An Atmanirbhar Entrepreneur Who Integrated Traditional Pottery Art with Modern Technology.

Lakhpati Didi

रायपुर, 15 मई। Lakhpati Didi : रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड ग्राम स्थित बासनपाली की मालती कुंभकार ने पारंपरिक मिट्टी कला को आधुनिक तकनीक से आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा दीया है। सरकारी मान्यता और प्रशिक्षण के सहयोग से आज वे ‘लखपति बहन’ के रूप में पहचाने जा रहे हैं।

पारंपरिक चक से आधुनिक तकनीक तक का सफर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साईं के निर्देशानुसार सुशासन तिहार के दौरान मालती कुंभकार ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की। पहले वे पारंपरिक लकड़ी के चाक से दिये और मिट्टी के बर्तन बनाते थे, लेकिन सीमित औपचारिक कारण उत्पादन और आय दोनों सीमित थे।

बिहान कार्यक्रम बोर्ड से जुड़ने के बाद उनकी एकता महिला स्व-सहायता समूह को माटी कला बोर्ड और हस्तशिल्प के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक चाक और आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इससे उनके काम की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में बड़ा बदलाव आया।

अब बनी रही हैं आधुनिक मिट्टी के उत्पाद

मालती अब केवल पारंपरिक पुरातात्विक ही नहीं, बल्कि आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार मिट्टी के कुकर, मसाले, पानी की बोतल, कप-प्लेट, सजावटी बर्तन और देवी-देवताओं की मूर्तियां भी तैयार कर रही हैं।

व्यवसाय को बढ़ाने के लिए उन्होंने 30 हजार, 80 हजार और 1 लाख रुपये तक का कर्ज लेकर अपने काम का विस्तार करने के लिए विभिन्न प्रकार की छूट दी। आज उनकी मांडल की मांग रायपुर से लेकर जगदलपुर तक प्रदेशभर में बढ़ रही है।

प्रदेशभर के मेलों में मिल रही पहचान

मालती कुम्भकार सरस मेला और हस्तशिल्प मेले जैसे प्रमुख आयोजनों में अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं। शासन की ओर से कलाकारों के लिए आवास एवं भोजन की निःशुल्क व्यवस्था भी उपलब्ध करायी जा रही है, जिससे उन्हें बड़ी सहायता मिलती है। मालती का कहना है कि सरकारी मंजूरी से उन्हें आर्थिक धरोहरों के साथ भी मिला हुआ है। आज वे न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

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