Site icon AB News.Press

CG High Court : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…! अब बेल के लिए देनी होगी पूरी कुंडली…जमानत आवेदन में छिपाई जानकारी तो बढ़ सकती है मुश्किल

CG High Court: A Major Verdict from the Chhattisgarh High Court! Now, a Complete Personal Dossier Must Be Submitted for Bail—Concealing Information in the Bail Application Could Lead to Serious Trouble.

CG High Court

बिलासपुर, 14 मई। CG High Court : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जमानत प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब बेल के लिए आवेदन करने वाले आरोपियों को पहले से कहीं ज्यादा विस्तृत जानकारी देनी होगी। हाईकोर्ट ने जमानत आवेदन के पुराने फॉर्मेट को बदलते हुए नए नियम लागू कर दिए हैं, जो 11 मई 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

हाईकोर्ट द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के नियम, 2007 में संशोधन किया गया है। कोर्ट का मानना है कि पुराने फॉर्मेट में जरूरी जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पाती थी, जिससे सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों को समझने में परेशानी होती थी।

अब जमानत आवेदन साधारण प्रारूप में स्वीकार नहीं (CG High Cour) किए जाएंगे। आवेदकों को एक तय टैबुलर फॉर्मेट में केस से जुड़ी हर अहम जानकारी देनी होगी, ताकि सुनवाई के समय जज के सामने पूरा रिकॉर्ड एक ही जगह उपलब्ध रहे।

नए नियमों में क्या-क्या देना होगा?

नए फॉर्मेट को छह मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। इसमें आरोपी को निम्न जानकारी देना अनिवार्य होगा, जैसे- एफआईआर नंबर और दर्ज तारीख। संबंधित थाना और लगी धाराएं। धाराओं में मिलने वाली अधिकतम सजा। गिरफ्तारी की तारीख और जेल में बिताई गई अवधि। केस की वर्तमान स्थिति। चार्जशीट दाखिल हुई या नहीं। ट्रायल की स्थिति और गवाहों की संख्या। अब तक दर्ज गवाहों के बयान। इसके अलावा यदि आरोपी के खिलाफ पहले से कोई अन्य एफआईआर दर्ज है, तो उसकी पूरी जानकारी भी देनी होगी। पुराने मामलों की स्थिति, जैसे मामला लंबित है, आरोपी बरी हुआ है या सजा हो चुकी है, यह सब बताना अनिवार्य रहेगा।

पिछली बेल अर्जियों का भी देना होगा रिकॉर्ड

हाईकोर्ट ने साफ किया है कि यदि आरोपी ने पहले जमानत के लिए आवेदन किया था, तो उसकी जानकारी भी आवेदन में देनी होगी। इसमें यह बताना होगा कि आवेदन किस अदालत में लगाया गया था और उसका क्या फैसला आया।

अगर आरोपी के खिलाफ कभी गैर-जमानती वारंट जारी हुआ हो या उसे भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया हो, तो उसका विवरण भी अब अनिवार्य रूप से आवेदन में शामिल करना होगा। कोर्ट का उद्देश्य है कि जमानत (CG High Cour) मामलों की सुनवाई अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और तथ्यात्मक तरीके से हो सके। माना जा रहा है कि नए नियमों से बेल प्रक्रिया में फर्जी या अधूरी जानकारी देने की संभावना कम होगी।

Exit mobile version