रायपुर, 14 मई। BJP Controversy : छत्तीसगढ़ भाजपा में प्रदेश कार्यसमिति की नई टीम को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। कोर कमेटी से कई वरिष्ठ नेताओं को बाहर किए जाने के बाद अब 23 विधायकों को प्रदेश कार्यसमिति में जगह न दिए जाने से पार्टी के अंदर नया विवाद खड़ा हो गया है।
भाजपा की पुरानी परंपरा रही है कि सभी निर्वाचित विधायक प्रदेश कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए जाते हैं। लेकिन इस बार 54 विधायकों में से केवल 14 मंत्रियों और 17 विधायकों को ही शामिल किया गया। जबकि विधानसभा सचेतक सुशांत शुक्ला, पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े, अनुज शर्मा, ललित चंद्राकर, धर्मजीत सिंह, ईश्वर साहू, प्रबोध मिंज समेत कुल 23 विधायकों को पूरी तरह बाहर रख दिया गया।
पहली बैठक में मुद्दा गरमाया
पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक शुरू होते ही यह मुद्दा गर्म चर्चा का विषय बन गया। राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगा है कि जिस बैठक में महापौर, जिला प्रभारी और निगम-मंडलों के अध्यक्षों को आमंत्रित किया गया, वहां इतनी बड़ी संख्या में विधायकों को नजरअंदाज करना क्या संदेश दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कई विधायकों ने बंद कमरे में संगठन पर गुटबाजी और पक्षपात के आरोप लगाए। नाराज विधायकों का कहना है कि राष्ट्रीय परिषद में सभी विधायकों को सदस्य बनाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में चयन में साफ भेदभाव किया गया। कुछ नेताओं का आरोप है कि संगठन में कुछ खास लोगों के करीबियों को प्राथमिकता दी गई, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले विधायकों की अनदेखी की गई।
बैठक के दौरान एक और मुद्दा भी चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजल-पेट्रोल की खपत कम करने की अपील के बावजूद बैठक में बड़ी संख्या में वाहनों के पहुंचने पर कई पदाधिकारियों ने आपत्ति जताई। कई नेता दो-तीन गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे, जिस पर कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि बैठक को वर्चुअल माध्यम से भी आयोजित किया जा सकता था।

