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Green Gold बना ग्रामीणों की ताकत… बढ़ी तेंदूपत्ता दर से जंगलों में लौटी रौनक… 5500 रुपये प्रति मानक बोरा मिलने से संग्राहकों में बढ़ा उत्साह

'Green Gold' Becomes the Strength of Villagers... Forests Regain Their Vibrancy Thanks to Increased Tendu Leaf Rates... Collectors' Enthusiasm Soars as They Receive ₹5,500 Per Standard Bag.

Green Gold

रायपुर, 11 मई। Green Gold : जेठ की तपती धूप के बीच कोरबा जिले के रामपुर क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण का सीजन ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। ‘हरे सोने’ के नाम से पहचाने जाने वाले तेंदूपत्ते की खरीदी इस बार पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिला संग्राहक शामिल हुए। बढ़ी हुई खरीदी दर ने संग्राहकों के चेहरे पर खुशी और भरोसे की नई चमक ला दी है।

महिलाओं ने संभाली संग्रहण की जिम्मेदारी

सुबह सूरज निकलने से पहले ही श्रीमती कारी बाई पटेल और श्रीमती खेमबाई पटेल अपने परिवारों के साथ जंगल पहुंच गई थीं। दोपहर तक तेंदूपत्ते की गड्डियां तैयार कर वे खरीदी केंद्र पहुंचीं, जहां पूरे फड़ में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। दोनों महिलाओं ने दिन की पहली ‘बोहनी’ कर सीजन की शुरुआत की।

बढ़ी दर से मजबूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था

शासन द्वारा इस वर्ष तेंदूपत्ता खरीदी की दर 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है। इसका सीधा लाभ जनजातीय और ग्रामीण परिवारों को मिल रहा है। संग्राहकों का कहना है कि समय पर सरकारी खरीदी शुरू होने से उन्हें बिचौलियों से राहत मिली है और अब उन्हें उचित पारिश्रमिक व बोनस की गारंटी मिल रही है।

डिजिटल भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

वनोपज समिति प्रबंधकों के अनुसार इस वर्ष खरीदी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है। गड्डियों की गिनती और गुणवत्ता परीक्षण आधुनिक मानकों के अनुसार किया जा रहा है। साथ ही संग्राहकों के बैंक खातों में डिजिटल माध्यम से भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की देरी न हो।

‘हरा सोना’ बना आत्मनिर्भरता का आधार

अनुकूल मौसम के कारण इस बार पत्तों की गुणवत्ता बेहतर बताई जा रही है, जिससे संग्राहकों की आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत हुई है। ग्रामीणों के लिए तेंदूपत्ता केवल वनोपज नहीं, बल्कि आजीविका और आर्थिक स्थिरता का बड़ा सहारा बन चुका है। प्रशासन ने संग्राहकों से अपील की है कि वे शासन द्वारा निर्धारित दरों और मानकों का पालन करते हुए अपना तेंदूपत्ता केवल सहकारी समिति केंद्रों में ही बेचें, ताकि उन्हें योजनाओं और बोनस का पूरा लाभ मिल सके।

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