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Sukma Development : 78 साल बाद रोशनी से जगमगाया गोगुंडा… सुकमा के दूरस्थ गांव में पहली बार जला बल्ब… विकास की नई उम्मीद जागी

Sukma Development: Gogunda Lit Up After 78 Years... A Light Bulb Glows for the First Time in a Remote Sukma Village... Sparking New Hope for Development.

Sukma Development

रायपुर, 08 मई। Sukma Development : सुकमा जिले की दुर्गम पहाड़ियों में बसे गोगुंडा गांव में आजादी के 78 साल बाद पहली बार बिजली पहुंची है। करीब 650 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस गांव में जैसे ही पहली बार बल्ब जले, पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल बन गया। वर्षों तक अंधेरे और अलगाव में जीवन बिताने वाले ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि विकास और नए जीवन की शुरुआत बन गई है।

अंधेरे से उजाले तक का सफर

गोगुंडा गांव लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा। यहां के लोग ढिबरी और टॉर्च के सहारे जीवन गुजारते थे। बच्चे रात में पढ़ाई नहीं कर पाते थे और महिलाएं अंधेरा होते ही घरों में सिमट जाती थीं। अब बिजली पहुंचने के बाद गांव की तस्वीर बदलने लगी है। शाम होते ही घरों में बल्ब जलने लगे हैं और बच्चों की पढ़ाई की आवाजें सुनाई देने लगी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार उन्हें महसूस हो रहा है कि उनका गांव भी देश के विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। गांव के बुजुर्ग माड़वी सुक्का भावुक होकर कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीवनकाल में गांव में बिजली की रोशनी देख पाएंगे।

नक्सल प्रभाव वाले इलाके में विकास की नई शुरुआत

गोगुंडा लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां पहुंचने के लिए लोगों को घंटों पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रशासन, पुलिस और सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के संयुक्त प्रयासों से इलाके में सुरक्षा कैंप स्थापित हुआ, जिसके बाद विकास कार्यों को गति मिली।

अब गांव में पहुंच रहीं बुनियादी सुविधाएं

सुरक्षा कैंप स्थापित होने के बाद गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकान जैसी सुविधाएं शुरू हुईं। प्रशासन अब यहां सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गोगुंडा में बिजली पहुंचना विकास यात्रा की केवल शुरुआत है।

बस्तर में बदलती तस्वीर की मिसाल

गोगुंडा की यह रोशनी केवल एक गांव की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र में लौटते विश्वास और बदलते हालात की तस्वीर है। दशकों तक भय और अंधेरे में जीने वाले इस गांव में अब उम्मीद, शिक्षा और विकास की नई किरण दिखाई देने लगी है।

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