Medicinal Farming से बदल रही किसानों की तस्वीर… वच की खेती बन रही छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों के लिए ‘हरा सोना

Medicinal Farming से बदल रही किसानों की तस्वीर… वच की खेती बन रही छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों के लिए ‘हरा सोना

रायपुर, 08 मई। Medicinal Farming : छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़ते हुए औषधीय फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व और छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के मार्गदर्शन में प्रदेश के कई जिलों में वच (स्वीट फ्लैग) की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए आय का नया और लाभकारी स्रोत बनकर उभरी है। कम लागत और अधिक मुनाफे वाली इस खेती ने विशेषकर वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

वैश्विक बाजार में बढ़ रही वच की मांग

वच, जिसे स्थानीय भाषा में घोड़बच भी कहा जाता है, एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है जिसकी जड़ों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल उत्पादों, अगरबत्ती, सुगंधित तेल और सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी बढ़ती मांग के कारण यह फसल किसानों के लिए “हरा सोना” साबित हो रही है। औषधि पादप बोर्ड किसानों को पौधे, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें इस खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

11 गांवों में शुरू हुई नई खेती की पहल

वर्तमान में धमतरी, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और रायपुर सहित 11 गांवों में लगभग 38 एकड़ क्षेत्र में वच की खेती की जा रही है। राज्य सरकार के “नई सुबह की ओर” अभियान के तहत आदिवासी किसान अब ब्राह्मी और वच जैसी औषधीय फसलों को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं।

कम लागत में अधिक मुनाफा

जहां पहले एक एकड़ धान की खेती से किसानों को सीमित लाभ मिलता था, वहीं अब वच की खेती से एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। किसानों ने वैज्ञानिक पद्धति और जैविक तकनीकों को अपनाकर इस खेती को सफल बनाया है। जुलाई माह में अंकुरित कंदों की रोपाई की जाती है और रासायनिक खादों के बजाय गोबर खाद तथा जीवामृत का उपयोग किया जाता है। कम पानी और कम कीट प्रकोप के कारण रखरखाव खर्च भी बेहद कम रहता है।

प्रसंस्करण से बढ़ी गुणवत्ता और आय

लगभग नौ महीने की मेहनत के बाद अप्रैल-मई में फसल तैयार होती है। किसानों ने केवल कच्चा माल बेचने के बजाय जड़ों की सफाई, कटाई और पॉलिशिंग कर उन्हें ए-ग्रेड गुणवत्ता में तैयार किया, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिली। यही कारण है कि वच की खेती किसानों के लिए तेजी से लाभकारी व्यवसाय बनती जा रही है।

हर्बल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

किसानों का कहना है कि औषधीय खेती ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है और अब वे इस खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। बोर्ड द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण और विपणन सहयोग ने किसानों में नया आत्मविश्वास जगाया है। यह सफलता साबित करती है कि तकनीकी नवाचार और औषधीय खेती का समन्वय छत्तीसगढ़ के किसानों को समृद्धि की नई दिशा दे सकता है।

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