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BC SAKHI बनकर बदली तकदीर… इरागांव की संतोषी सिन्हा ने 3500 से अधिक खाते खोलकर गांव को जोड़ा बैंकिंग और डिजिटल दुनिया से

Destiny Transformed by Becoming a BC Sakhi... Santoshi Sinha of Iragaon Connects Her Village to the Banking and Digital World by Opening Over 3,500 Accounts.

BC SAKHI

रायपुर, 05 मई। BC SAKHI : छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड स्थित इरागांव की निवासी संतोषी सिन्हा आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की मिसाल बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने संकल्प और मेहनत से न केवल खुद को सशक्त किया, बल्कि पूरे गांव को बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

2018 में शुरू हुआ सफर, आज बनीं बदलाव की पहचान

संतोषी सिन्हा ने वर्ष 2018 में बीसी सखी के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। वे “सीता सावित्री स्व-सहायता समूह” से जुड़ी हैं और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से ग्रामीणों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी और जागरूकता का अभाव बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने काम को विस्तार देती रहीं।

3500 खाते और 3.5 करोड़ से अधिक लेन-देन: भरोसे की बनीं पहचान

अपने समर्पण से संतोषी अब तक 3500 से अधिक बैंक खाते खुलवा चुकी हैं और करीब 25 हजार लेन-देन कर चुकी हैं, जिनकी कुल राशि 3.5 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने 212 पेंशनधारियों को नियमित भुगतान सुनिश्चित कराया और प्रधानमंत्री आवास योजना के 75 हितग्राहियों को लाभ दिलाने में सहयोग किया।

सरकारी योजनाओं से जोड़ा, सामाजिक सुरक्षा को दिया बल

संतोषी ने ग्रामीणों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई—

इन प्रयासों ने गांव में आर्थिक सुरक्षा और जागरूकता को मजबूत किया।

डिजिटल सेवाओं से गांव में आई नई क्रांति

उनके सेवा केंद्र के जरिए ग्रामीण अब एलआईसी प्रीमियम जमा, मोबाइल-टीवी रिचार्ज, नगद जमा-निकासी, धन अंतरण, बिजली बिल भुगतान, आयुष्मान कार्ड निर्माण और पीएम किसान केवाईसी जैसी सुविधाएं आसानी से प्राप्त कर रहे हैं। इससे गांव में डिजिटल समावेशन को नई दिशा मिली है।

कोरोना काल में निभाई अहम जिम्मेदारी

कोरोना महामारी के दौरान जब अधिकांश सेवाएं ठप थीं, तब संतोषी सिन्हा ने घर-घर जाकर बुजुर्गों को पेंशन और जरूरतमंदों को भुगतान उपलब्ध कराया। इस समर्पण ने उन्हें गांव में एक विश्वसनीय और सम्मानित पहचान दिलाई।

आज संतोषी सिन्हा हर महीने 10 से 11 हजार रुपये तक का कमीशन कमा रही हैं और अब तक लगभग 6.25 लाख रुपये की आय अर्जित कर चुकी हैं। यह उनकी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास का परिणाम है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संतोषी सिन्हा की यह सफलता बताती है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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