रायपुर, 01 मई। Wildlife Conservation : छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन क्षेत्र बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में इस गर्मी के दौरान वन्यजीव संरक्षण का अनोखा मॉडल देखने को मिल रहा है। जब प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं, तब वैज्ञानिक जल प्रबंधन प्रणाली वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।
वन विभाग ने पूरे अभयारण्य का मैपिंग कर 240 से अधिक जल स्रोतों—तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और कृत्रिम सॉसर—की पहचान की है। ऐसी रणनीति बनाई गई है कि हर 5 वर्ग किलोमीटर में वन्यजीवों को पानी उपलब्ध हो सके।
टेक्नोलॉजी से निगरानी, जियो-टैगिंग से कंट्रोल
यह मॉडल पूरी तरह डेटा आधारित है। जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की गई है और हर 15 दिन में जल स्तर की निगरानी की जाती है। ‘स्टाफ गेज’ के जरिए पानी की मात्रा मापकर जरूरत के अनुसार तुरंत व्यवस्था की जाती है।
पानी की गुणवत्ता पर भी खास ध्यान
वन्यजीवों को सुरक्षित पानी मिले, इसके लिए pH और TDS स्तर की नियमित जांच की जा रही है। जहां प्राकृतिक स्रोत सूख गए हैं, वहां टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। जल स्रोतों के पास ‘साल्ट लिक’ बनाए गए हैं, जिससे जानवरों को जरूरी खनिज भी मिल सकें। यह व्यवस्था गर्मी के दौरान उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर रही है।
बना रहा है देश के लिए मॉडल
वन विभाग के अनुसार यह प्रणाली केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान है। लगातार निगरानी और तकनीक के उपयोग से यह मॉडल भविष्य के वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक उदाहरण बनकर उभर रहा है।

