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Mobile Medical Unit बनी जीवनदायिनी सेवा… 2035 ग्रामीणों को घर के पास मिला इलाज

Mobile Medical Unit Becomes a Lifesaving Service... 2,035 Villagers Receive Treatment Right at Their Doorsteps

Mobile Medical Unit

रायपुर, 01 मई। Mobile Medical Unit छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है। ‘अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार’ की परिकल्पना को साकार करते हुए इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म

पहले इन इलाकों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से शुरू हुई यह सेवा विशेष पिछड़ी जनजाति ‘कमार’ बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार, औराई और कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में लगातार कैंप लगा रही है। अब ग्रामीणों को इलाज के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है।

एक ही जगह जांच और दवा

यह चलती-फिरती अस्पताल यूनिट पूरी तरह सुविधाओं से लैस है। प्रत्येक यूनिट में मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की टीम मौजूद रहती है।

मुनादी से मिलती है समय पर सूचना

प्रशासन द्वारा कैंप की तारीख और स्थान पहले से तय कर गांवों में मुनादी कर सूचना दी जाती है। इससे ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ी है और कैंप में अच्छी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

समय और खर्च दोनों की बचत

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पहले अस्पताल जाने में पूरा दिन और काफी पैसा खर्च हो जाता था। अब गांव में ही इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

परंपरा से आधुनिक इलाज की ओर बढ़ते कदम

इस पहल का सबसे बड़ा असर ग्रामीणों की सोच में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। जो लोग पहले पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, वे अब आधुनिक चिकित्सा पद्धति पर भरोसा करने लगे हैं। लोग अब समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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