Herbal Products : पलाश के फूल बने ग्रामीणों की आय का सहारा… औषधीय गुणों से बढ़ी मांग… कटघोरा वनमंडल में संग्रहण बढ़ा

Herbal Products : पलाश के फूल बने ग्रामीणों की आय का सहारा… औषधीय गुणों से बढ़ी मांग… कटघोरा वनमंडल में संग्रहण बढ़ा

रायपुर, 01 मई। Herbal Products : पलाश (टेसू या ढाक) का फूल केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका का मजबूत आधार बनता जा रहा है। इसके नारंगी-लाल फूल, जिन्हें “जंगल की आग” भी कहा जाता है, वसंत ऋतु में जंगलों को रंगीन बनाने के साथ-साथ ग्रामीणों के जीवन में समृद्धि भी लाते हैं।

औषधीय और सांस्कृतिक महत्व

पलाश (Butea monosperma) आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना जाता है। इसके फूल, बीज और गोंद (कमरकस) का उपयोग चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में किया जाता है। साथ ही, यह प्राकृतिक रंग और त्वचा देखभाल उत्पादों के रूप में भी उपयोगी है।

कटघोरा में बढ़ रहा संग्रहण

कटघोरा वनमंडल में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, चौतमा और पाली क्षेत्रों में इसका व्यापक संग्रहण किया जाता है।

  • 2022-23: 402 क्विंटल (116 संग्राहक)
  • 2023-24: 58 क्विंटल (40 संग्राहक)
  • 2024-25: 147 क्विंटल (107 संग्राहक)
  • 2025-26: 76 क्विंटल (20 संग्राहक)

पलाश का मूल्य भी लगातार बढ़ा है—900 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।

संग्राहकों को मिला सीधा लाभ

वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से संग्रहण और विपणन को संगठित किया गया है। वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपये का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

रोजगार और पर्यावरण दोनों को लाभ

पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने इको-फ्रेंडली विकल्प के रूप में लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का बड़ा साधन बन रहे हैं। साथ ही, होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल रंग बनाने में भी इसका उपयोग बढ़ा है।

प्राकृतिक रंगों से बढ़ रही आय

ग्रामीण महिलाएं पलाश फूलों से हर्बल गुलाल और रंग तैयार कर बाजार में बेच रही हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है।

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