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Swasthya Bastar Abhiyan : दुर्गम जंगलों से उम्मीद की राह… 310 किमी सफर तय कर मरीज को मिला समय पर इलाज… दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की नई मिसाल

Swasthya Bastar Abhiyan: A Path of Hope Through Inaccessible Forests... Patient Receives Timely Treatment After a 310 km Journey... Setting a New Benchmark for Healthcare Services in Remote Regions.

Swasthya Bastar Abhiyan

रायपुर, 30 अप्रैल। Swasthya Bastar Abhiyan : स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र के मरीज को बेहतर इलाज दिलाने के लिए स्वास्थ्य टीम ने सराहनीय प्रयास किया। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन में पोटकपल्ली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुटेपढ़ गांव से मरीज को पहले किस्टाराम और फिर जिला अस्पताल सुकमा तक पहुंचाया। इस दौरान मरीज ने कुल 310 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया, जिससे समय पर उपचार संभव हो सका।

310 किलोमीटर का संघर्ष, बची एक जिंदगी

यह पूरी प्रक्रिया सतत स्क्रीनिंग, प्रभावी काउंसलिंग, समय पर रेफरल और मजबूत फॉलो-अप व्यवस्था के कारण संभव हो पाई। सेक्टर मेडिकल ऑफिसर के समन्वय और स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत ने इस अभियान को और अधिक प्रभावी बना दिया।

17 मरीजों को मिला नया जीवन

अभियान के अंतर्गत किस्टाराम और मरईगुड़ा के अंदरूनी गांवों से कुल 17 मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। इनमें से 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर प्रिंट किए गए, जिससे इलाज के दौरान आर्थिक परेशानी नहीं हुई।

आंखों की जांच और मुफ्त चश्मा वितरण

कोंटा क्षेत्र से आए मरीजों की आंखों की जांच कर 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरित किया गया, जबकि मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को ऑपरेशन की सलाह दी गई। इसके अलावा अस्थमा और पैरों में सूजन से पीड़ित मरीजों को विशेष जांच के लिए भेजा गया। मरईगुड़ा सेक्टर और पोटकपल्ली टीम के स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि स्वास्थ्य बस्तर अभियान दूरस्थ क्षेत्रों के लिए वास्तव में जीवनदायी पहल बनकर उभर रहा है।

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