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BALA Model : आंगनबाड़ी केंद्रों से संवर रहा भविष्य… शिक्षा-पोषण का बना समग्र मॉडल

BALA Model: Futures Being Shaped at Anganwadi Centers... An Integrated Model for Education and Nutrition

BALA Model

रायपुर, 30 अप्रैल। BALA Model : देश का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ आकार ले रहे हैं। जो केंद्र कभी केवल पोषण तक सीमित थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के एक समन्वित मॉडल में बदल चुके हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जिलों में यह बदलाव साफ नजर आ रहा है।

Building as Learning Aid (BALA) की अभिनव अवधारणा ने आंगनबाड़ी केंद्रों को जीवंत कक्षा में बदल दिया है। मनरेगा और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से बने इन भवनों में दीवारों, फर्श और सीढ़ियों को ही शिक्षण सामग्री बना दिया गया है। रंग-बिरंगी चित्रकारी के जरिए बच्चे अब अक्षर, अंक, आकृतियां और स्थानीय परिवेश को खेल-खेल में सीख रहे हैं।

धमतरी का ‘बाला मॉडल’ बना मिसाल

धमतरी जिले में इस मॉडल ने प्रारंभिक शिक्षा को रोचक बना दिया है। मनरेगा, आईसीडीएस और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण शुरू हुआ, जिनमें से 51 पूरे हो चुके हैं।
ग्राम उड़ेंना का केंद्र इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहां बच्चे खेलते-सीखते हुए ज्ञान हासिल कर रहे हैं।

शिक्षा के साथ रोजगार का भी सशक्त आधार

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत इन भवनों के निर्माण से ग्रामीणों को रोजगार मिला है। इससे न केवल अधोसंरचना मजबूत हुई, बल्कि पलायन में भी कमी आई और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला।

खेल-खेल में सीखता बचपन, बदलता माहौल

महासमुंद के शहरी क्षेत्रों से लेकर नारायणपुर के वनांचल तक, आंगनबाड़ी केंद्र अब प्ले-स्कूल जैसे दिखने लगे हैं। रंगीन दीवारें, खेल सामग्री और शैक्षणिक चार्ट बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे उनकी उपस्थिति और सीखने की रुचि बढ़ी है।

पोषण, स्वास्थ्य और जागरूकता का केंद्र

ये केंद्र अब केवल बच्चों तक सीमित नहीं हैं। यहां गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों को भी पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। साथ ही “लड़का-लड़की एक समान” जैसे संदेश सामाजिक बदलाव की दिशा भी तय कर रहे हैं।

सरकारी योजनाओं का मजबूत माध्यम

इन केंद्रों के जरिए कई योजनाएं प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं, जैसे:

आरओ जल, स्वच्छ रसोई, सुरक्षित खेल परिसर और महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी ने इन केंद्रों को और प्रभावी बनाया है। इससे बच्चों की उपस्थिति और सीखने की निरंतरता में सुधार हुआ है। आज आंगनबाड़ी केंद्र “पहली पाठशाला” से कहीं आगे बढ़कर शिक्षा, पोषण, रोजगार और सशक्तिकरण का केंद्र बन चुके हैं। ये बदलाव न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहा है, बल्कि एक समावेशी और विकसित भारत की मजबूत नींव भी रख रहा है।

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