रायपुर, 28 अप्रैल। Project Dhadkan : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को नया जीवन दिया है। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही पारूल की रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद वह अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है। यह पहल अब जिले में सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद बन गई है, जिनके लिए अपने बच्चों की हर धड़कन अनमोल है।
अबूझमाड़ के सुदूर अंचल में रहने वाली पारूल पहले जल्दी थक जाती थी और अन्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। सीमित संसाधनों और जानकारी के अभाव में उसके माता-पिता उसकी गंभीर बीमारी से अनजान थे। लेकिन ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ के जरिए समय पर पहचान और उपचार ने उसकी जिंदगी बदल दी।
गांव-गांव पहुंचा स्वास्थ्य अभियान, हजारों बच्चों की जांच
फरवरी 2026 में शुरू हुए इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने दूरस्थ गांवों में पहुंचकर 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की। जांच के दौरान तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले, जिनमें पारूल भी शामिल थी। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल इलाज की व्यवस्था की और बच्चों को रायपुर भेजा गया।
10 अप्रैल को सफल सर्जरी, अब स्वस्थ जीवन की शुरुआत
विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद 10 अप्रैल 2026 को पारूल की सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद निगरानी में रखकर उसका उपचार किया गया। अब पारूल स्वस्थ है, खेल रही है और अपने परिवार के साथ नई ऊर्जा के साथ जीवन जी रही है।
बाल स्वास्थ्य सुरक्षा में मील का पत्थर बन रहा ‘प्रोजेक्ट धड़कन’
जिला प्रशासन के अनुसार इस योजना का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराना है। दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर उन्हें लाभ पहुंचाने की योजना है।
उम्मीद और भरोसे की नई कहानी
यह सिर्फ एक बच्ची के इलाज की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलाव की मिसाल है जहां शासन की संवेदनशीलता दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच रही है। अब इन क्षेत्रों के परिवारों को भरोसा है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित है और हर धड़कन की रक्षा के लिए सरकार उनके साथ खड़ी है।

