रायपुर, 29 अप्रैल। Naxal Reform : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सली अब ‘नवनिर्माण’ की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। लाइवलीहुड कॉलेज स्थित पुनर्वास केंद्र में उन्हें न सिर्फ सुरक्षा, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी मिल रहा है। जो हाथ कभी बंदूक थामे हुए थे, वही अब खेती और विकास की दिशा में ट्रैक्टर का स्टीयरिंग संभाल रहे हैं।
लोकतंत्र से जुड़ाव, पहचान और अधिकार की नई शुरुआत
प्रशासनिक पहल के तहत पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। हाल ही में 8 लोगों को वोटर आईडी कार्ड प्रदान किए गए, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सके हैं। इसके साथ ही 40 अन्य लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है, जो उन्हें समाज में बराबरी का अधिकार दिलाने की दिशा में अहम कदम है।
कलेक्टर की पहल पर शुरू हुआ कौशल प्रशिक्षण
पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों ने ट्रैक्टर चलाने और उसकी मरम्मत सीखने की इच्छा जताई, जिस पर कलेक्टर ने तुरंत पहल करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कराया। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में ये सभी आधुनिक कृषि यंत्रों के संचालन और रखरखाव की बारीकियां सीख रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई लोगों ने पहले कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी, लेकिन अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ नई तकनीक सीख रहे हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
यह प्रशिक्षण केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन रहा है। इससे उन्हें खेती और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
बदलाव की मिसाल बन रहा नारायणपुर
नारायणपुर का यह पुनर्वास केंद्र अब केवल एक सुविधा स्थल नहीं, बल्कि विश्वास और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन गया है। यह उदाहरण दर्शाता है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में लौटकर विकास में अपनी भूमिका निभा सकता है।

